
अभी से घटने लगा पांगोली नदी का जलस्तर (सौजन्यः सोशल मीडिया)
Gondia Water Scarcity: इस वर्ष पर्याप्त बारिश होने के बावजूद ठंड की शुरुआत में ही नदियों और नहरों का जलस्तर तेजी से घटने लगा है। इससे रबी मौसम में सिंचाई की समस्या गंभीर होती जा रही है। किसानों को आशंका है कि पानी की कमी के कारण रबी की फसल को भारी नुकसान झेलना पड़ सकता है। हर साल की तरह इस वर्ष भी अच्छी बारिश हुई थी, जिससे उम्मीद थी कि गर्मी तक जलस्तर स्थिर रहेगा।
लेकिन नवंबर माह में ही नाले सूखने लगे। गोरेगांव और गोंदिया तहसील से बहने वाली पांगोली नदी में भी पानी का भंडार लगातार कम होता जा रहा है। इससे कृषि सिंचाई की समस्या गंभीर रूप से उभर रही है और रबी फसल खतरे में पड़ने की आशंका है।
प्रकृति की मार और अन्य समस्याओं से किसान पहले ही संकट में हैं, ऐसे में उपज और बाजार मूल्य दोनों ही उनकी चिंता बढ़ा रहे हैं। ठंड की शुरुआत में ही नदी-नालों का जलस्तर कम होना संकेत देता है कि भविष्य में नागरिकों को भी पेयजल की समस्या झेलनी पड़ सकती है। गर्मियों में यह जल संकट और भी भयावह रूप ले सकता है।
पांगोली नदी का उद्गम गोरेगांव तहसील के ग्राम तेढ़ा स्थित एक छोटे तालाब से होता है। लगभग 70 किमी लंबी यह नदी आगे चलकर बाघ नदी से मिलती है। पहले नदी की गहराई और चौड़ाई अधिक थी, जिससे सालभर पानी उपलब्ध रहता था। इसी जल से कई गांवों में पेयजल आपूर्ति होती थी और सैकड़ों हेक्टेयर खेतों की सिंचाई होती थी। इसीलिए पांगोली नदी को गोंदिया की “जीवनदायिनी” कहा जाता है। लेकिन समय पर देखभाल और मरम्मत नहीं होने के कारण यह नदी आज नाले में बदलती जा रही है।
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दिवाली के बाद अधिकांश नालों में जलस्तर गिरने से मवेशियों को पीने के पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। इस वर्ष गर्मी से पहले ही जल संकट शुरू हो गया है, जिससे पशुओं के लिए पीने के पानी की उपलब्धता एक बड़ी समस्या बन गई है।






