'चुनावों में पैसे बांटे जाते हैं...', अजित पवार गुट के नेता के विवादित बयान से मचा सियासी घमासान

Prafull Patel: एनसीपी के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल ने गोंदिया में सार्वजनिक समारोह में दावा किया कि चुनावों में पैसे बांटे जाते हैं। इसके बाद विरोधियों उन पर निशाना साधा है।
Prafull Patel Money Distribution Remark
एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Prafull Patel Money Distribution Remark: पूर्व केंद्रीय मंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल ने चुनावों को लेकर एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। रविवार को गोंदिया में एक सार्वजनिक समारोह को संबोधित करते हुए, पटेल ने दावा किया कि चुनावों में पैसे बांटे जाने के बावजूद भी मतदाता अपनी इच्छा से वोट देते हैं।

एनसीपी के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री प्रफुल्ल पटेल ने चुनावों में पैसे के वितरण को लेकर एक सनसनीखेज दावा करके राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। उन्होंने यह टिप्पणी गोंदिया में एक सार्वजनिक समारोह को संबोधित करते हुए की थी।

प्रफुल्ल पटेल ने यह स्वीकार किया कि चुनावों में पैसे बांटे जाते हैं। हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि पैसे लेने के बाद भी यह जरूरी नहीं कि मतदाता प्रभावित हों। पटेल ने अपने दावे को मजबूती देते हुए कहा कि पैसे लेने के बाद भी मतदाता अपनी इच्छा से वोट देते हैं। पटेल के इस बयान ने तुरंत ही राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है।

नेताओं को 'बाहुबली' बनने से किया आगाह

प्रफुल्ल पटेल ने अपनी टिप्पणी के दौरान नेताओं को खुद को 'बाहुबली' के रूप में पेश करने के खिलाफ भी कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने आगाह करते हुए कहा कि किसी को भी खुद को ‘बाहुबली' नहीं समझना चाहिए।

पटेल ने इस बात पर भी ध्यान दिलाया कि अतीत में कई ऐसे नेताओं को चुना गया है, जो 'बाहुबली' के रूप में जाने जाते थे। उन्होंने कहा, ‘‘अतीत में हमने कई बाहुबलियों को चुना है''। उनकी यह टिप्पणी नेताओं के व्यवहार और मतदाताओं पर उनके कथित प्रभाव के बारे में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक संदेश देती है।

सुप्रिया सुले ने टिप्पणी पर दी प्रतिक्रिया

प्रफुल्ल पटेल की टिप्पणी पर तुरंत ही प्रतिक्रिया देते हुए शरद पवार गुट की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने अपनी बात रखी। उन्होंने साफ किया कि वह पटेल की टिप्पणियों का समर्थन नहीं करती हैं।

सुप्रिया सुले ने स्पष्ट किया कि उनके लिए राजनीति हमेशा से जनसेवा का एक माध्यम बनी हुई है। उन्होंने कहा कि मैंने हमेशा महसूस किया है कि राजनीति लोगों की सेवा करने का एक माध्यम है। उनकी प्रतिक्रिया दर्शाती है कि उन्होंने राजनीति को धन वितरण के माध्यम के बजाय सेवा के माध्यम के रूप में देखने पर जोर दिया।

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