नगरीय निकाय चुनाव पर संकट के बादल, आरक्षण ड्रा पर आपत्तियां, अदालत जाने की कर रहे तैयारी

Maharashtra Local Body Elections: राज्य चुनाव आयोग द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों के अनुसार, जिला चुनाव प्रणाली ने आगामी समय में होने वाले चार नगरीय निकायों के चुनाव कार्य में तेजी ला दी है।
Maharashtra Local Body Elections: राज्य चुनाव आयोग द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों के अनुसार, जिला चुनाव प्रणाली ने आगामी समय में होने वाले चार नगरीय निकायों के चुनाव कार्य में तेजी ला दी है।
नगर परिषद गोंदिया (सौजन्य-नवभारत)
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Gondia News: वार्ड संरचना प्रकाशित हो चुकी है, आरक्षण ड्रा और मतदाता सूची प्रकाशित हो चुकी है। लेकिन नियम एक, क्रियान्वयन अलग कैसे है? यह सवाल उठाकर गोंदिया की वार्ड संरचना, सालेकसा और गोरेगांव के आरक्षण ड्रा पर सवाल उठाकर आपत्तियां उठाई गई हैं। इतना ही नहीं, कुछ नागरिक न्यायालय जाने के मूड में हैं। इसलिए, यह संदेह व्यक्त किया गया है कि आगामी नवंबर और दिसंबर में चुनाव कार्यक्रम घोषित होने की उम्मीद कम है।

गोरेगांव, सालेकसा, गोंदिया और तिरोड़ा इन चार नगरीय निकायों के चुनाव पिछले चार वर्षों से लंबित चल रहे हैं। चुनाव कार्यक्रम की घोषणा जल्द या बाद में होने की प्रतीक्षा कर रहे नागरिकों के साथ-साथ, चुनाव लड़ने के इच्छुक लोग भी एक-एक दिन का समय बर्बाद कर रहे थे। इस बीच, सुप्रीम कोर्ट ने ओबीसी आरक्षण की समस्या हल कर 2015 के अनुसार आरक्षण अद्यतन करने के निर्देश देते हुए स्थानीय निकाय चुनाव कराने का निर्देश दिया।

प्रणाली का कामकाज शुरू

जिसके अनुसार, राज्य चुनाव आयोग ने स्थानीय निकाय चुनाव के अनुरूप काम करना शुरू कर दिया। इससे उम्मीद जगी कि दिसंबर तक चुनाव हो जाएंगे। एक ओर, प्रणाली का कामकाज शुरू हुआ, दूसरी ओर, जो लोग चुनाव लड़ने के इच्छुक थे, उन्होंने भी तैयारी शुरू कर दी। लेकिन, चुनाव प्रणाली द्वारा घोषित आरक्षण के अलावा, मतदाता सूची के प्रकाशन और वार्ड संरचना जैसी सभी प्रक्रियाओं पर सवालिया निशान लगने लगे हैं। इसके लिए आपत्तियां भी आमंत्रित की गई हैं।

अदालत जाने की कर रहे तैयारी

सालेकसा में दिए गए कोटे से अधिक आरक्षण दिया गया था। जबकि गोरेगांव में 2015 का आरक्षण यथावत रखा गया था, गोंदिया में वार्ड संरचना में एक बड़ा बदलाव किया गया था। इन सभी पर कुछ नागरिकों द्वारा आपत्तियां दर्ज की गई है। नियमों का कार्यान्वयन कैसे अलग है? यह सवाल आपत्तिकर्ताओं द्वारा उठाया जा रहा है।

इसलिए, जिला इस बात पर ध्यान दे रहा है कि चुनाव प्रणाली दर्ज की गई आपत्तियों पर क्या निर्णय लेती है। इतना ही नहीं, कुछ आपत्तिकर्ता चुनाव प्रणाली की कार्यप्रणाली को लेकर अदालत जाने की तैयारी कर रहे हैं। गोंदिया में वार्ड संरचना पर याचिका न्यायालय ने स्वीकार कर ली है। इसलिए, इस बात पर संदेह व्यक्त किया जा रहा है कि दिसंबर में होने वाले चुनाव अब और नहीं टलेंगे।

उल्टी चर्चाएं शुरू

चारों नगर निकायों गोंदिया, गोरेगांव, सालेकसा और तिरोड़ा में आम चुनाव होने वाले हैं। लेकिन, बड़ी संख्या में आपत्तियां दर्ज की गई हैं, जिससे व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। क्या व्यवस्था की यह गलती सुविधाजनक नहीं है? यह चुनाव कार्यक्रम में देरी की कोई साजिश नहीं है, बल्कि एक उलटी चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, आपत्तियों के समाधान की प्रक्रिया पर ध्यान दिया गया है।

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