महाराष्ट्र का बड़ा फैसला, गोंदिया मानव-वन्यजीवों की गतिविधियों पर अब AI की नजर; ग्रामीणों को मिलेगा अलर्ट

Gondia Human Wildlife Conflict: मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए महाराष्ट्र सरकार 1000 गांवों में AI आधारित सतर्कता प्रणाली लागू करेगी। इससे वन्यजीवों की गतिविधियों की सूचना ग्रामीणों को मिल सकगी।
Major Decision by Maharashtra: AI to Now Monitor Human-Wildlife Activity in Gondia; Villagers to Receive Alerts.
मानव वन्यजीव संघर्ष, एआई सतर्कता प्रणाली,(सोर्स: सौजन्य AI)
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Gondia Wildlife Monitoring Village Safety: गोंदिया मानव-वन्यजीव संघर्ष टालने के लिए राज्य शासन ने बड़ा निर्णय लेते हुए राज्य के एक हजार गांवों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सतर्कता प्रणाली स्थापित करने की मंजूरी दी है। वन क्षेत्र से सटे गांवों में वन्य प्राणियों की गतिविधियों की जानकारी नागरिकों को तत्काल मिले और संभावित हमले टाले जा सकें, इसके लिए यह प्रणाली कार्यान्वित की जाएगी। मानव वन्यजीव संघर्ष अत्याधुनिक रोकने के लिए नियंत्रण कक्ष स्थापित किए जाएंगे।

इन नियंत्रण कक्षों के माध्यम से वन विभाग के वाहन, गश्ती दल और अन्य साधन-सामग्री का नियंत्रण व निरीक्षण किया जाएगा। वन्य प्राणियों की गतिविधियों अथवा संघर्ष की स्थिति उत्पन्न होने पर संबंधितों को तत्काल सतर्क किया जाएगा। वन क्षेत्र के बाहर वन्य प्राणियों का आवागमन पाए जाने पर ग्रामवासियों को तुरंत सूचना मिल सके, इसके लिए कृत्रिम, बुद्धिमत्ता आधारित सतर्कता प्रणाली को प्रायोगिक तौर पर कुछ गांवों में कार्यान्वित किया गया था।

2 स्थानों पर नसबंदी केंद्र स्थापित

फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले हिरण, बंदर, जंगली सूअर जैसे प्राणियों को पकड़ने के लिए घूमती टुकड़ियां भी तैयार की जाएंगी। यह टुकड़ियां अत्याधुनिक साधनों से सुसज्ज होंगी। साथ ही बंदर व जंगली सूअरों की संख्या नियंत्रण में रखने के लिए राज्य में दो स्थानों पर नसबंदी केंद्र स्थापित करने का नियोजन किया गया है। इन उपाययोजनाओं से मानव वन्यजीव संघर्ष कम होने में मदद होने के साथ किसानों की फसलों का नुकसान भी टलने की उम्मीद व्यक्त की जा रही है।

वन्य प्राणियों की मुक्ति के लिए 20 स्थानों पर करेंगे बचाव दल तैयार

इस प्रणाली के सकारात्मक परिणामों को देखते हुए अब राज्य के एक हजार गांवों में इसका विस्तार किया जाएगा। इसके अलावा पकड़े गए वन्य प्राणियों के लिए दो बचाव केंद्र तथा उपचार के लिए उपचार केंद्र स्थापित किए जाएंगे, वन्य प्राणियों की मुक्ति के लिए राज्य में 20 स्थानों पर त्वरित बचाव दल तैयार किए जाएंगे और वन क्षेत्र से सटे गांवों में दो हजार प्राथमिक प्रतिक्रिया दलों की स्थापना की जाएगी।

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