बारिश में देरी पड़ी भारी, गोंदिया में जल संकट की आहट; प्रकल्पों में सिर्फ 22.67% पानी शेष

Gondia Water Crisis: गोंदिया के मध्यम सिंचाई प्रकल्पों में केवल 22.67% जल संग्रह बचा है। जून के पहले पखवाड़े में बारिश नहीं हुई तो जिले में जल संकट और पशुओं के लिए पानी की समस्या बढ़ सकती है।
Delayed Rains Take a Heavy Toll: Looming Water Crisis in Gondia; Only 22.67% Water Remains in Reservoirs
गोंदिया जल संकट, बांधों में पानी,(सोर्स: सौजन्य AI)
Published on: 
Updated on: 

Gondia Water Storage: गोंदिया पिछले साल मानसून के दौरान जिले में औसत से ज्यादा बारिश हुई थी। इसके चलते जिले के सभी बांधों में भरपूर पानी का संग्रह हुआ था। रबी की फसलों की सिंचाई के लिए अलग-अलग प्रकल्पों से पानी छोड़ा गया था। इसलिए 30 मई शनिवार तक जिले के मध्यम प्रकल्पों में सिर्फ 22.67 प्रश जल संग्रह बचा है। अगर जून के पखवाड़े में बारिश ने उपस्थिति नहीं दिखाई तो जिले में पानी की कमी का संकट उत्पन्न होने की संभावना है।

ग्रामीण इलाकों में जानवरों को भी पानी की कमी का सामना करना पड़ेगा। गोंदिया जिले के सभी आठ तहसीलों में इस साल मानसून के दौरान भारी बारिश हुई। जून से सितंबर तक औसत से ज्यादा बारिश हुई। जिससे जिले में पानी का जलस्तर बढ़ गया था। इस वजह से जिले के लघु सिंचाई विभाग के सभी लघु, मध्यम और छोटे तालाबों में जल का संग्रह हो गया था।

इन प्रकल्पों से खरीफ और रबी की फसलों की सिंचाई के बाद, तीनों तरह के प्रकल्पों की मौजूदा हालत बहुत खराब है। पानी का संग्रह बहुत कम बचा है। इस वजह से लोगों और जानवरों को तेज धूप में पानी की कमी का सामना करना पड़ रहा है।

मामा तालाब जलस्तर कम होने से वे सूख गए हैं। मध्यम प्रकल्प के साथ ही गांव के तालाब भी सूख गए हैं। जिले की नदियां और नहरें सूख चूकी हैं, और पानी ढूंढ़ने पर भी मिलना नामुमकिन हो गया है। इस वजह से ग्रामीणों को अपने जानवरों को नदियों से नहीं, बल्कि घर लाकर पानी पिलाना पड़ रहा है।

उम्मीद है की बारिश आने तक प्रकल्प में जल संग्रह काफी

गर्मी का जोर बढ़ गया है। पारा दिन-ब-दिन बढ़ रहा है। इस वजह से प्रकल्पों में जल संग्रह कम हो गया है। हालांकि, उम्मीद है कि बारिश आने तक जल संग्रह काफी रहेगा। अभी 22.67 प्रश। जल संग्रह शेष है।

- गोंदिया, सिंचाई विभाग, अधीक्षक अभियंता, राजू कुरेकार

गाद जमा होने से जलस्तर क्षमता घटी

  • मानसून के दौरान जिले में पानी का संग्रह बढ़ गया था। अभी मध्यम प्रकल्पों में सिर्फ 22.67 प्रश ही जल संग्रह है। 38 मामा तालाबों को देखें तो इन तालाबों में जलस्तर नहीं के बराबर है।
  • लघु सिंचाई विभाग के तीनों तरह के प्रकल्पों की कुल संग्रह क्षमता 117.933 मिलियन क्यूबिक मीटर है। इसका प्रश बहुत कम है। गाद जमा होने से जलस्तर क्षमता घटी।
  • पिछले कई सालों से जिले के प्रकल्पों की रुकावटे दूर नहीं हुई हैं। इस वजह से जल संग्रह की क्षमता कम हो गई है और हर साल गर्मियों में लोगों को पानी की कमी का सामना करना पड़ता है।
  • अगर प्रकल्पों की गाद हटा दी जाए तो जल संग्रह की क्षमता बढ़ जाएगी।

छोटे जल प्रकल्प की वर्तमान की स्थिति

क्रमांक प्रकल्प जल संग्रह (%)
1 बोदलकसा 27.66
2 चौरखमारा 14.07
3 चुलबंध 38.63
4 खैरबंधा 16.33
5 रेंगेपार 25.67
6 संग्रामपुर 5.87
7 कटंगी 20.11
8 कलपावरी 11.98
Navbharat Live
navbharatlive.com