कलपाथरी मध्यम सिंचाई परियोजना बनी ‘सफेद हाथी’, हजारों किसान सिंचाई से वंचित
Kalpathari Irrigation Project: गोरेगांव तहसील में कलपाथरी मध्यम सिंचाई परियोजना के बावजूद हजारों किसान सिंचाई से वंचित हैं।
- Written By: आंचल लोखंडे
Goregaon water crisis (सोर्सः सोशल मीडिया)
Goregaon Water Crisis: गोरेगांव तहसील में रबी सीजन की बुआई शुरू हो चुकी है और फसलों को बड़े पैमाने पर पानी की आवश्यकता है। इसके बावजूद क्षेत्र में दो सिंचाई परियोजनाएं होने के बाद भी किसानों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा है। विशेष रूप से अर्जुनी मोरगांव विधानसभा क्षेत्र की कलपाथरी मध्यम सिंचाई परियोजना किसानों के लिए ‘सफेद हाथी’ साबित हो रही है।
सरकार ने लगभग 1915 हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई के दायरे में लाने के उद्देश्य से इस परियोजना का निर्माण किया था। हजारों किसानों ने अपनी जमीन इस परियोजना के लिए दी, लेकिन वर्तमान में केवल लगभग 500 हेक्टेयर क्षेत्र में ही पानी की आपूर्ति हो पा रही है। शेष 1415 हेक्टेयर क्षेत्र के किसान अब भी सिंचाई के लाभ से वंचित हैं। फिलहाल परियोजना का पानी मुख्य रूप से मोहाड़ी, बबई, कमरगांव और चोपा गांवों के कुछ हिस्सों तक ही सीमित है। इससे परियोजना के उद्देश्य और वास्तविक लाभ के बीच बड़ा अंतर स्पष्ट होता है।
कई गांव अब भी पानी से वंचित
तेलनखेड़ी, घुमर्रा, पलखेड़ा, तुमसर, निंबा, तिल्ली मोहगांव और तानुटोला सहित कई गांवों के किसानों को अब तक पानी नहीं मिल सका है। कुछ स्थानों पर भू-भाग ऊंचा-नीचा होने के कारण नहरों का निर्माण नहीं किया गया।
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वहीं हिराटोला, महसगांव, देवाटोला, पंचवटी, दवडीपार, बोटे और झांझिया गांवों तक नहरें तो बनाई गईं, लेकिन वे अधूरी और जर्जर अवस्था में हैं। परिणामस्वरूप परियोजना से छोड़ा गया पानी अंतिम छोर तक नहीं पहुंच पाता। यह समस्या कई वर्षों से बनी हुई है, जिसके कारण हर रबी सीजन में किसानों को फसलों का नुकसान उठाना पड़ता है।
जनप्रतिनिधियों के आश्वासन, कार्रवाई शून्य
सिंचाई के मुद्दे पर कई बार आंदोलन, ज्ञापन और बैठकों का आयोजन किया गया। जनप्रतिनिधियों ने आश्वासन दिए, लेकिन जमीनी स्तर पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई। किसानों का कहना है, “हमने जमीन दी और वर्षों इंतजार किया, फिर भी हमारे खेतों तक पानी नहीं पहुंचा।” किसानों की मांग है कि सरकार तत्काल नहरों की मरम्मत कर परियोजना को पूर्ण क्षमता से शुरू करे।
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तात्कालिक उपायों की आवश्यकता
- विशेषज्ञों के अनुसार परियोजना को प्रभावी बनाने के लिए निम्न कदम जरूरी हैं:
- अधूरी नहरों का निर्माण शीघ्र पूरा किया जाए।
- टूटी और गाद से भरी नहरों की मरम्मत व सफाई की जाए।
- ऊंचाई वाले क्षेत्रों के लिए वैकल्पिक लिफ्ट सिंचाई योजना लागू की जाए।
- पानी वितरण की सुनियोजित समय-सारिणी जारी की जाए।
- स्थानीय स्तर पर निगरानी समिति का गठन किया जाए।
परियोजना का मूल उद्देश्य तहसील के कृषि क्षेत्र को सिंचाई के दायरे में लाकर उत्पादन बढ़ाना था, लेकिन वर्तमान स्थिति में यह लक्ष्य अधूरा दिखाई दे रहा है। रबी सीजन के मद्देनजर पानी का संकट और भी गंभीर हो गया है। अब देखना यह है कि प्रशासन किसानों की मांगों पर कब तक कार्रवाई करता है।
