एकनाथ शिंदे पर टिप्पणी मामला: विशेषाधिकार समिति के सामने पेश हुए कुणाल कामरा, अब 10 मार्च को होगी अगली सुनवाई
Kunal Kamra News: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी मामले में स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा और सुषमा अंधारे विशेषाधिकार समिति के सामने पेश हुए।
- Written By: आकाश मसने
कुणाल कामरा (सोर्स: सोशल मीडिया)
Kunal Kamra Appears Privilege Committee: स्टैंड-अप कॉमेडियन कुणाल कामरा और शिवसेना (UBT) नेता सुषमा अंधारे मंगलवार को महाराष्ट्र विधान परिषद की विशेषाधिकार समिति के समक्ष पेश हुए। यह मामला मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के खिलाफ की गई कथित अपमानजनक टिप्पणियों से जुड़ा है। हालांकि, मुख्य शिकायतकर्ता और भाजपा नेता प्रवीण दारेकर के उपस्थित न होने के कारण समिति ने सुनवाई को 10 मार्च तक के लिए टाल दिया है।
क्या है पूरा मामला?
विवाद की जड़ पिछले साल का वह वाक्या है जब कुणाल कामरा ने अपने एक शो के दौरान उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर एक पैरोडी गीत गाया था। इस गीत में उन्होंने परोक्ष रूप से शिंदे को “गद्दार” कहकर संबोधित किया था। शिवसेना (UBT) की नेता सुषमा अंधारे ने भी इस मामले में कामरा का समर्थन किया था। इसके बाद भाजपा नेता प्रवीण दारेकर ने कामरा और अंधारे दोनों के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया था।
समिति की कार्यवाही और स्थगन
विशेषाधिकार समिति के अध्यक्ष प्रसाद लाड ने मीडिया को जानकारी दी कि कुणाल कामरा अपना बयान दर्ज कराने के लिए तैयार थे। लाड ने कहा कि कामरा समिति के सामने आए और सहयोग की इच्छा जताई, लेकिन प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के अनुसार, शिकायतकर्ता की अनुपस्थिति में एकतरफा बयान दर्ज करना उचित नहीं होता। इसलिए तय किया गया है कि दोनों पक्षों के बयान 10 मार्च को शाम 4 बजे एक साथ दर्ज किए जाएंगे।
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सुनवाई के बाद क्या बोले कुणाल कामरा?
सुनवाई के बाद कुणाल कामरा ने कहा कि वह सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। गौरतलब है कि इससे पहले उन्हें मुंबई आने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकियां मिली थीं। वहीं सुषमा अंधारे ने प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि हम यह जानना चाहते थे कि हमारे खिलाफ असल में क्या आरोप लगाए गए हैं, लेकिन शिकायतकर्ता के न होने से आज कुछ स्पष्ट नहीं हो सका।
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शिवसेना यूबीटी नेता सुषमा अंधारे ने उस घटना का भी जिक्र किया जिसमें कामरा के परफॉरमेंस वाले स्टूडियो में तोड़फोड़ की गई थी। दूसरी ओर, कामरा ने उन खबरों को भी सिरे से खारिज कर दिया जिसमें दावा किया गया था कि उन्होंने खुद सुनवाई टालने की मांग की थी।
राजनीतिक गलियारों में हलचल
यह मामला महाराष्ट्र की राजनीति में अभिव्यक्ति की आजादी बनाम संवैधानिक पदों के सम्मान की बहस को फिर से गरमा रहा है। जहां सत्ता पक्ष इसे मुख्यमंत्री के पद की गरिमा का अपमान बता रहा है, वहीं विपक्ष इसे आवाज दबाने की कोशिश करार दे रहा है।
