गोंदिया ने जीती नक्सलवाद से जंग! 20 साल में 40 नक्सलियों का आत्मसमर्पण, हिंसा के 'रेस्ट जोन' से मिली आजादी

Gondia Naxal Surrender: गोंदिया पुलिस की बड़ी जीत! 2005 से अब तक 40 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण। 'रेस्ट जोन' से 'नक्सल-मुक्त' होने की राह पर गोंदिया जिला।
In 20 years, 40 Naxals have surrendered in Gondia district under Govt scheme.
नक्सल आत्मसमर्पण (सौजन्य-सोशल मीडिया)
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Maharashtra Naxalism Free: गोंदिया जिला अति संवेदनशील व नक्सलग्रस्त था। अब जिले में नक्सल आंदोलन ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। सरकार ने विकास में रुकावट डाल रहे नक्सलियों को विकास के रास्ते पर लाने के लिए आत्मसमर्पण योजना शुरू की है। 2005 से 2025 तक 20 वर्षों में गोंदिया जिले में अब तक 40 नक्सली आत्मसमार्पण कर चुके हैं।

इसलिए, गोंदिया, जिसे रेस्ट जोन माना जाता था, अब नक्सलवाद से मुक्त होने की राह पर है। नक्सली हिंसक गतिविधियों को अंजाम देकर नागरिकों के मन में डर पैदा कर रहे थे। उन्होंने आदिवासी लोगों को गुमराह करके उन्हें नक्सल आंदोलन की ओर मोड़ दिया था। नक्सल आंदोलन की ओर मुड़े सैकड़ों आदिवासी नागरिकों को नारकीय यातनाएं झेलनी पड़ीं।

नक्सलियों के लिए आत्मसमर्पण योजना

सरकार ने वर्ष 2005 में नक्सलियों के लिए आत्मसमर्पण योजना लागू की। इस योजना से गोंदिया जिले के 40 नक्सलियों को फायदा हुआ। महाराष्ट्र सरकार ने आत्मसमर्पण योजना लागू की है ताकि नक्सली मुख्यधारा में आ सकें और बेहतर जीवन जी सकें। इस योजना के तहत गोंदिया जिले में अब तक 40 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है।

आत्मसमर्पण करने वाले इन नक्सलियों को सरकार की ओर से इनाम और दूसरे फायदे दिए जाते हैं। केंद्र सरकार ने नक्सलियों को 31 मार्च से पहले आत्मसमर्पण करने की चेतावनी दी थी। इस वजह से बड़ी संख्या में नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया। गोंदिया जिला, जो नक्सलियों का रेस्ट जोन था, अब नक्सल-मुक्त हो गया है। नक्सली भी सरकार की मुख्यधारा में आ गए हैं।

आत्मसमर्पित नक्सलियों पर लाखों का इनाम

गोंदिया जिले में आत्मसमर्पण करने वाले ये सभी नक्सली दरेकसा दलम से जुड़े थे, जिसे महाराष्ट्र-मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ (एमएमसी) जोन में सबसे सक्रिय नक्सली ग्रुप माना जाता है। गोंदिया पुलिस को नक्सल विरोधी कार्रवाई में बड़ी सफलता मिली है। सीपीआई (माओवादी) के बहुत असरदार एमएमसी (माओवादी) जोन के नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया। आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सलियों पर लाखों रु। का इनाम रखा गया था।

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