Gondia News: पानी होने के बावजूद सिंचाई संभव नहीं, कई किसान सोलर पंप से वंचित
Irrigation Problem: गोंदिया जिले में ‘मांगेगा उसे सोलर कृषि पंप’ योजना के तहत आवेदन के छह महीने बाद भी सोलर पंप न मिलने से किसान परेशान हैं और रबी फसलें खतरे में हैं।
- Written By: आंचल लोखंडे
Irrigation Problem (सोर्सः सोशल मीडिया)
Gondia Solar Agriculture Pump: राज्य सरकार की ‘मांगेगा उसे सोलर कृषि पंप’ योजना के तहत आवेदन स्वीकृत होने के 60 दिनों के भीतर किसानों को सोलर कृषि पंप उपलब्ध कराना अनिवार्य है। लेकिन वास्तविकता यह है कि रबी सीजन में भी जिले के हजारों किसान अब तक सोलर पंप से वंचित हैं।
आवेदन करने के छह माह बाद भी सोलर पंप न मिलने के कारण किसानों की फसलें खतरे में पड़ गई हैं। जिले में योजना लागू होने के बाद बड़ी संख्या में किसानों ने सोलर कृषि पंप के लिए आवेदन किया था, लेकिन अब तक गिने-चुने किसानों के खेतों में ही सोलर पंप स्थापित किए गए हैं।
कंपनियों द्वारा टालमटोल
योजना के मार्गदर्शक दिशा-निर्देशों के अनुसार, आपूर्तिकर्ता कंपनी को आवेदन स्वीकृत होने के 60 दिनों के भीतर सोलर कृषि पंप स्थापित कर उसे चालू करना आवश्यक है। इसके लिए किसानों से ऑनलाइन डिपॉजिट राशि भी ली गई है। किसानों ने निर्धारित राशि जमा कर आपूर्तिकर्ता का चयन भी कर लिया है, इसके बावजूद कंपनियों द्वारा टालमटोल की जा रही है।
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किसानों को केवल आश्वासन
कभी सामग्री उपलब्ध न होने, कभी मजदूरों की कमी तो कभी तकनीकी कारणों का हवाला देकर किसानों को टाल दिया जा रहा है। कई किसानों ने छह से आठ माह पहले आवेदन किया था, फिर भी उन्हें अब तक सोलर पंप नहीं मिला है। बार-बार संपर्क करने के बावजूद किसानों को केवल आश्वासन ही दिए जा रहे हैं।
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किसान परेशान
जिन किसानों ने सोलर कृषि पंप के लिए आवेदन किया था, उन्होंने सरकार के पास डिपॉजिट राशि जमा कर दी है। इसके बावजूद पंप न मिलने से किसानों में भारी आक्रोश है। पहले से ही अनियमित बिजली आपूर्ति और रात में सिंचाई करने की मजबूरी से किसान परेशान हैं।
दिन में बिजली नहीं, रात में पानी नहीं
महावितरण द्वारा दिन के समय नियमित बिजली आपूर्ति न मिलने के कारण किसानों को रात में खेतों की सिंचाई करनी पड़ती है। रात में जंगली जानवरों का खतरा, मजदूरों की कमी और बढ़ती लागत ने किसानों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। पानी की पर्याप्त व्यवस्था न होने से रबी सीजन में गेहूं और चना जैसी फसलें खतरे में हैं। किसानों का कहना है कि यदि समय पर सिंचाई नहीं हुई, तो उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है।
