Gondia News: गोंदिया में दूध की आवक 10 हजार लीटर घटी, मिलावट विरोधी कार्रवाई का असर
Gondia Milk Adulteration: गोंदिया में दूध और पनीर में मिलावट के खिलाफ कार्रवाई के बाद दूध की दैनिक आवक में 10,112 लीटर की कमी दर्ज की गई है। छोटे सप्लायर और स्थानीय ब्रांडों पर असर पड़ा है।
गोंदिया दूध कारोबार- फाइल फोटो (सोर्सः सोशल मीडिया)
Gondia Milk Business: गोंदिया जिले में दूध और पनीर में मिलावट के खिलाफ खाद्य व औषधि प्रशासन की लगातार कार्रवाई का असर अब स्थानीय दूध कारोबार पर भी दिखाई देने लगा है। प्रशासन की सख्ती के बाद शहर में प्रतिदिन आने वाले दूध की मात्रा में करीब 10 हजार 112 लीटर की कमी दर्ज की गई है। इससे जहां मिलावटी दूध के कारोबार पर अंकुश लगने की उम्मीद जगी है, वहीं दूसरी ओर कई छोटे डेयरी संचालकों और स्थानीय ब्रांडों का कारोबार भी प्रभावित हुआ है।
जिला दुग्ध व्यवसाय विकास कार्यालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार पिछले दोतीन महीनों की तुलना में शहर में दूध की कुल आवक में थोड़ी गिरावट दर्ज हुई है। अप्रैल माह में जहां प्रतिदिन लगभग 64 हजार 102 लीटर दूध शहर में पहुंचता था, वहीं अब यह जून माह में घटकर करीब 53 हजार 990 लीटर हो गया है। अधिकारियों का मानना है कि यह बदलाव मिलावट के खिलाफ चल रहे अभियान का प्रत्यक्ष परिणाम है।
मिलावट रोकने की मुहिम से बढ़ेगी पारदर्शिता
लेकिन अन्य बड़े शहरों के मामले में वह घट जिले में काफी कम है। स्थानीय डेयरी संचालकों का कहना है कि प्रशासन की कार्रवाई के बाद कई छोटे स्तर के दूध सप्लायर और बिना पंजीकरण वाले ब्रांड बाजार से लगभग गायब हो गए हैं। कुछ कारोबारियों ने जांच के डर से आपूर्ति बंद कर दी है, जबकि कई ने गुणवत्ता सुधारने के बाद ही दोबारा बाजार में उतरने का निर्णय लिया है। शहर में दूध की आपूर्ति मुख्य रूप से तीन माध्यमों से होती है।
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मिलावट पर कार्रवाई से बदला दूध बाजार
पहला, सहकारी दुग्ध संघों द्वारा गांवों से दूध संग्रह कर शहर तक पहुंचाया जाता है। दूसरा, निजी डेयरी और बड़े वितरक रोजाना बड़ी मात्रा में दूध की सप्लाई करते हैं। तीसरा, शहर के बाहर के विशेष और प्रीमियम ब्रांड भी स्थानीय बाजार में अपनी आपूर्ति करते हैं। हाल के दिनों में सबसे अधिक असर छोटे और स्थानीय ब्रांडों पर देखने को मिला है।
दूध कारोबार में पारदर्शिता बढ़ेगीजानकारों का मानना है कि यदि प्रशासन की कार्रवाई इसी तरह जारी रही तो दूध के कारोबार में पारदर्शिता बढ़ेगी और उपभोक्ताओं को शुद्ध दूध उपलब्ध कराने की दिशा में सकारात्मक परिणाम मिलेंगे। हालांकि छोटे डेयरी संचालकों का कहना है कि प्रशासन को कार्रवाई के साथसाथ गुणवत्ता सुधार के लिए मार्गदर्शन भी देना चाहिए, ताकि ईमानदारी से कारोबार करने वालों को नुकसान न उठाना पड़े।
अप्रैल के बाद दिखा असर
जिला दुग्ध व्यवसाय विकास अधिकारी प्रदीप पातरे ने कहा किअप्रैल माह से मिलावट के खिलाफ अभियान तेज होने के बाद शहर में आने वाले दूध की मात्रा में लगभग 11 हजार 112 लीटर की कमी दर्ज की गई है। अप्रैल माह में प्रतिदिन जहां 64 हजार 102 लीटर दूध की आवक थी। वह अब जून माह में 53 हजार 990 लीटर हो गई है। गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। आगे भी यह कार्रवाई जारी रहेंगी।
जो ईमानदार हैं उन्हें कोई डर नहीं
दूध व्यवसायी उमेश गौतम ने कहा कि जो व्यापारी नियमों का पालन कर रहे हैं, उन्हें किसी प्रकार की परेशानी नहीं है। कार्रवाई केवल मिलावट करने वालों तक सीमित रहे और ईमानदार कारोबारियों को सहयोग मिले। सोनू नागदेव, संचालक गोंदिया डेयरी।छायाचित्र सोनु नागदेवछोटे सप्लायर दूध भेजना बंद कर चुकेजांच बढ़ने के बाद कई छोटे सप्लायर दूध भेजना बंद कर चुके हैं। बाजार में कुछ ब्रांड कम जरूर हुए हैं, लेकिन इससे ग्राहकों का भरोसा बढ़ा है।
