आंख दान करने से नेत्रहीनों की जिंदगी से दूर हो सकता है अंधेरा, नेत्रदान में गोंदिया ने हासिल किया चौथा स्थान
Gondia News: गोंदिया जिले में नेत्रदान के प्रति बढ़ती जागरूकता से 863 लोगों ने संकल्प लिया और 33 लोगों ने मृत्यु के बाद आंखें दान कीं, जिससे जिले ने महाराष्ट्र में चौथा स्थान हासिल किया।
- Written By: आंचल लोखंडे
Eye donation awareness Gondia (सोर्सः सोशल मीडिया)
Eye Donation Awareness Gondia: नेत्रदान को श्रेष्ठतम दान माना जाता है। मौत के बाद इंसान का शरीर नश्वर हो जाता है, लेकिन मृत्यु के 6 घंटे के भीतर नेत्रदान किया जा सकता है। इससे किसी जरूरतमंद की जिंदगी में छाया अंधेरा दूर किया जा सकता है। अब धीरे-धीरे शहर और ग्रामीण इलाकों के लोगों में इस बारे में जागरूकता बढ़ रही है और लोग नेत्रदान के लिए आगे आ रहे हैं।
पिछले वर्ष जिले के 863 लोगों ने आंखें दान करने के लिए संकल्प पत्र भरा, जबकि 33 लोगों ने मृत्यु के बाद आंखें दान कर समाज के सामने एक प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया। नक्सल प्रभावित और आदिवासी बहुल माने जाने वाले गोंदिया जिले ने नेत्रदान के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करते हुए राज्य में चौथा स्थान हासिल किया है।
नेत्रहीनों को फिर से रोशनी मिलना संभव
देश में दृष्टिहीन लोगों की संख्या काफी अधिक है। कुछ लोग बीमारियों के कारण तो कुछ दुर्घटनाओं की वजह से अपनी दृष्टि खो देते हैं, जिससे वे दुनिया की खूबसूरती देखने से वंचित रह जाते हैं। हालांकि, विज्ञान और तकनीक में हुई प्रगति के कारण अब कॉर्निया प्रत्यारोपण के माध्यम से नेत्रहीनों को फिर से रोशनी मिलना संभव हो गया है।
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लोगों में जागरूकता
मृत्यु के 6 घंटे के भीतर आंख से कॉर्निया (नेत्रगोलक का हिस्सा) निकालना जरूरी होता है। आंख दान करने से कॉर्निया संबंधी बीमारी से पीड़ित मरीजों को दृष्टि मिल सकती है। गंभीर संक्रामक बीमारियों से पीड़ित व्यक्तियों को छोड़कर लगभग हर व्यक्ति नेत्रदान कर सकता है। एक व्यक्ति के नेत्रदान से दो नेत्रहीनों को रोशनी मिल सकती है। इन बातों को लेकर जिले में लोगों में जागरूकता बढ़ रही है, जिसके चलते कई लोगों ने शासकीय मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग में मृत्यु के बाद आंखें दान करने का संकल्प पत्र भरा है।
नेत्रदान के लिए क्या करें?
गंभीर रूप से संक्रामक बीमारियों से पीड़ित व्यक्ति को छोड़कर कोई भी नेत्रदान कर सकता है। इसके लिए एक सहमति पत्र भरना होता है। इसके बाद नेत्रदान करने वाले व्यक्ति का पंजीकरण किया जाता है और सरकारी अस्पताल की ओर से ‘डोनर कार्ड’ दिया जाता है।
नेत्रदाता की मृत्यु के तुरंत बाद उनके परिजनों को बिना समय गंवाए नजदीकी सरकारी अस्पताल को इसकी सूचना देनी चाहिए, ताकि समय पर कॉर्निया निकाला जा सके। यदि व्यक्ति ने जीवनकाल में नेत्रदान का संकल्प पत्र नहीं भरा हो, तो मृत्यु के बाद परिजन भी समय रहते नेत्रदान का निर्णय लेकर यह पुण्य कार्य कर सकते हैं।
