गांवों में फर्जी पशु चिकित्सकों का बोलबाला, इलाज के नाम पर किसानों से अधिक वसूली, कार्रवाई नगण्य

Fake Veterinarians: पशुओं का इलाज करने वाले फर्जी चिकित्सकों की संख्या बढ़ जाती है। इसी में यदि पशुधन का रोग निदान करते समय गलत औषधोपचार किया गया तो पशुओं पर संकट निर्मित हो जाता है।
गांवों में फर्जी पशु चिकित्सकों का बोलबाला
गांवों में फर्जी पशु चिकित्सकों का बोलबाला
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Gondia News: पालतु मवेशियों को विभिन्न प्रकार की बीमारी का सामना करना पड़ता है। जैसे मवेशियों के पैरों में जख्म होना, मच्छरों का काटना, शरीर पर लाल दाग आना, जुबान बंद रहना, चारा नही खाना आदि अन्य प्रकार की बीमारियों का समावेश होता है। इसी मौके का लाभ उठाने के लिए पशुओं का इलाज करने वाले फर्जी चिकित्सकों की संख्या बढ़ जाती है। इसी में यदि पशुधन का रोग निदान करते समय गलत औषधोपचार किया गया तो पशुओं पर संकट निर्मित हो जाता है।

जिले के कई गांवों में ऐसे फर्जी चिकित्सकों का बोलबाला होता है। स्वयं को चिकित्सक बताकर जानवरों का इलाज कर किसानों से अधिक वसूली की तस्वीर भी सामने आते रहती है। गलत इलाज से कई जानवरों की मौत भी हो जाती है। लेकिन ऐसे फर्जी चिकित्सकों पर कोई कार्रवाई नहीं हो पाती।

वाहनों पर डॉक्टर का निशान लगाकर जनता को गुमराह कर रहे

जिले में लोगों का मुख्य व्यवसाय कृषि है। दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए विभिन्न योजनाएं लागू की जाती हैं। कृषि आधारित व्यवसाय के रूप में दुग्ध व्यवसाय भी होता है। क्षेत्र में दुग्ध उत्पादन होने के कारण जिले सहित कुछ स्थानों पर दुग्ध संग्रहण केंद्र हैं। कुछ किसानों के पास सिंचाई सुविधा होने से बारह महीने में पशुओं के लिए चारा उपलब्ध होता है। अनेक किसानों के पास 10-15 जानवर होने से उन्हें चिकित्सकों की आवश्यकता पड़ती है। इससे फर्जी डाक्टरों की संख्या में इजाफा हुआ है। वे अपने घर, वाहनों पर डॉक्टर का निशान लगाकर जनता को गुमराह कर रहे हैं।

फर्जी पशु चिकित्सों के खिलाफ कार्रवाई की मांग

कुछ गांवों में करीब चार से पांच पशु चिकित्सक फर्जी कारोबार कर रहे हैं। उनके इलाज से कई जानवरों में विकलांगता आ जाती हैं। जिले सहित तहसील के सरकारी अस्पतालों के पशु चिकित्सालय में किसान पशुओं को इलाज कराने ले जाते है लेकिन वहां डाक्टर नहीं होने के कारण पशुपालकों को लौटना पड़ता है। परिणाम यह है कि क्षेत्र के किसानों को फर्जी डाक्टरों से इलाज कराना पड़ता है। प्रशासन से फर्जी पशु चिकित्सों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जा रही है।

गलत इलाज के कारण मर जाते हैं पशु

कई फर्जी लोग स्वयं को पशु चिकित्सक बताकर जानवरों की जांच कर इलाज करते है, कई जानवर उनके गलत इलाज के कारण मर जाते है। लेकिन यंत्रणा द्वारा कार्रवाई नहीं की जाती। अनेक जानवर विभिन्न बीमारियों से संक्रमित होते है। लेकिन यहां के पशु चिकित्सों द्वारा अनदेखी की जाती है। सरकारी डाक्टर निजी व्यवसाय करने में लगे हुए रहते हैं। ऐसे में किसानों को आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है। मवेशियों के इलाज के लिए ग्रामों में शिविर आयोजित करने मांग नागरिकों द्वारा की जा रही है।

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