3 माह से रोगायो मजदूरों को नहीं मिली मजदूरी

MNREGA
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  •  मजदूरों पर भुखमरी की नौबत, सोनेरांगी का मामला 

कुरखेडा. रोगायो अंतर्गत मजगी का कार्य करने को 3 माह का कालावधि बितने के बावजूद मजदूरों के खाते में मजदूरी की राशी जमा नहीं हुई है. जिससे सोनेरांगी के मजदूरों पर भुखमरी की नौबत आयी है. 

कुरखेडा तहसील के सोनेरांगी में सोनेरांगी टोला से वासी टोला यह पगडंडी तथा यशवंत नकटू बावनथडे इनके खेत में मजगी का कार्य फरवरी 2022 में मनरेगा अंतर्गत ग्राम पंचायत स्तर पर किया गया. किंतू कार्य पूर्ण हुए 3 माह का कालावधि बितने के बावजूद मजदूरों के खाते में मजदूरी के पैसे जमा नहीं हुए है.

बतां दे कि, सरकार के नियमों के अनुसार कार्य पूर्ण होने के बाद 15 दिनों के भितर मजदूरों के बैंक खाते में उनकी मजदूरी जमा करना अनिवार्य है. किंतू सोनेरांगी में इससे विपरित मामला दिखाई दे रहा है. 3 माह का समय बितने के बावजूद रोगायो मजदूरों की मजदूरी जमा नहीं हुई है. जिससे मजदूरों पर भुखमरी की नौबत आयी है. 

40 प्रश नागरिकों की राशी जमा 

सोनेरांगी के कुल रोगायो मजदूरों में से 40 प्रश मजदूरों की मजदूरी उनके बैंक खाते में जमा की गई. अन्य 60 प्रश मजदूरों मजदूरी 3 माह का समय बितने के बाद भी जमा न होने से जीवनयापन कैसे करे, यह सवाल मजदूरों के समक्ष निर्माण हुआ है. आगामी कुछ दिनों में खरीफ सीजन को शुरूआत होनेवाली है. रोगायो मजदूरों में अनेक किसान भी है. इसी मजदूरी से खरीफ के लिए कुछ मदद होगी, यह आंस उन्हे थी. 

अन्यथा तीव्र आंदोलन करने की चेतावनी 

सोनेरांगी में मार्च 2022 से अपूर्ण होनेवाले कोई भी कार्य आगे शुरू नहीं किया गया. जिससे मजदूरों के पास बिते 2 माह से काम नहीं है. रोगायो के माध्यम से मजदूरों को गांव में ही मजदूरी उपलब्ध हो रही है, किंतू सोनेरांगी में बिते 2 माह से एक भी कार्य उपलब्ध नहीं हुआ है.

संबंधित विभाग ने इस गंभीर प्रश्न की ओर ध्यान देकर संबंधित मजदूरों की मजदूरी तत्काल उनके बैंक खाते में जमा करे, अन्यथा तीव्र आंदोलन करने की चेतावनी लालाजी गरमडे, अमृत घोटमारे, दिनेश कडाम, विजय वाघाडे, विजय गरमडे, भावेश होली, भजन वाघ, शकुंतला तुलावी, अनुसया वाघाडे, हिराजी मडावी, दिवाकर निकोडे, तेजराव ढोणे, नानाजी मडावी, मधुकर मडावी, आसाराम मडावी, संगीता वड्डे, बबिता उसेंडी, विलास हुर्रे, लिंबाजी हुर्रे, ईश्वर मडावी, निकेश मडावी, जनार्धन मडावी, रेशमा कुमरे आदि मजदूरों ने दी है. 

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