MNREGA फंड वितरण में राजनीतिक दखल पर HC सख्त, विधायकों की सिफारिश पर राशि जारी करने पर मांगा जवाब

Bombay High Court ने MNREGA फंड वितरण में कथित अवैधताओं पर राज्य सरकार से जवाब मांगा। याचिका में 1500 लाख रुपये और 1200 करोड़ रुपये के फंड में राजनीतिक हस्तक्षेप का आरोप।
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बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर खंडपीठ (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Bombay High Court On MNREGA Fund: महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) योजना के तहत धन के वितरण में कथित तौर पर खुली अवैधताओं और पक्षपातपूर्ण व्यवहार के संबंध में दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया। क्या यह राशि जनप्रतिनिधियों की सिफारिशों पर जारी की जा सकती है जबकि वे अधिनियम के तहत राशि/अनुदान जारी करने की सिफारिश करने के लिए प्राधिकरण नहीं हैं। इस संदर्भ में बॉम्बे हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब दायर करने के आदेश दिए।

अखिल भारतीय ग्राम पंचायत एसोसिएशन द्वारा याचिका दायर की गई। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सुरभि नायडू गोडबोले, अधिवक्ता प्रकाश नायडू, अधिवक्ता जोसेफ बास्टियन और ध्रुव शर्मा ने पैरवी की।

याचिकाकर्ता एसोसिएशन ने याचिका में शिकायत की है कि राजनीतिक संबंध रखनेवाली कुछ ग्राम पंचायतों के अधिकारियों को प्रभावित करके वरिष्ठता सूची को दरकिनार करते हुए प्राथमिकता मिल रही है और उन्हें नियमों के विरुद्ध जाकर फंड जारी किए जा रहे हैं।

विधायकों से संबंध, अधिकारियों को किया प्रभावित

याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी कर रहीं अधिवक्ता सुरभि नायडू ने कोर्ट को बताया कि 2022, 2023 और 2024 से संबंधित स्वीकृत फंड ट्रांसफर ऑर्डर (एफटीओ) के संबंध में लगभग 1500 लाख रुपये का वितरण लंबित है।

इस प्रक्रिया के तहत ग्राम पंचायतों द्वारा कार्य पूरा करने के बाद पंचायत समिति एफटीओ की जांच और उसे जारी करती है जिसे संबंधित जिला परिषदों द्वारा मुहर लगाकर मनरेगा आयुक्त को अनुमोदन और वितरण के लिए भेजा जाता है।

याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि विधायकों और राजनीतिक हस्तियों के साथ प्रभावशाली संबंध रखने वाली कुछ ग्राम पंचायतों ने अपने सिफारिश पत्र प्राप्त करके अधिकारियों को प्रभावित किया।

इसके परिणामस्वरूप वे 2022 से लंबित एफटीओ की तारीख-वार वरिष्ठता सूची को पार करने में सफल रहे और जनवरी-मार्च 2024 में पूरे किए गए कार्यों के लिए भी अपने फंड जारी करवाने में कामयाब रहे जिससे अन्य वैध ग्राम पंचायतों के दावे प्रभावित हुए।

1200 करोड़ का आवंटन

  • याचिका में बताया गया है कि फंड जारी न होने के कारण संबंधित ग्राम पंचायतें अपने उन वेंडरों को भुगतान नहीं कर पा रही हैं जिनसे विभिन्न सामुदायिक योजनाओं को लागू करने के लिए सामग्री प्राप्त की गई थी।
  • याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि सामग्री आपूर्तिकर्ताओं को उनकी वैध राशि से वंचित किया जा रहा है। याचिका के जवाब में जिला परिषद गोंदिया के उप मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने जवाब दाखिल किया और याचिकाकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों और सामग्री की पुष्टि की।
  • कोर्ट का मानना था कि रिकॉर्ड से यह अनुमान लगाया जा सकता है कि राशि का वितरण स्थानीय जनप्रतिनिधि के निर्देश पर किया जा रहा था। हालांकि हाई कोर्ट में मामला होने के कारण राज्य ने पहले दिशानिर्देशों का पालन करते हुए फंड वितरित किया था लेकिन हाल ही में स्थिति फिर बिगड़ गई।
  • हाल ही में सरकार द्वारा पूरे महाराष्ट्र में वितरित किए जाने के लिए लगभग 1200 करोड़ रुपये जारी किए गए थे जिसमें गोंदिया जिले के लिए लगभग 40 करोड़ रुपये आवंटित किए गए।
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