Muktipath Shaktipath campaign (सोर्सः सोशल मीडिया)
Paydi Liquor Ban: धानोरा तहसील के पयड़ी गांव की महिलाओं ने एकजुटता दिखाते हुए शराब विक्रेताओं के खिलाफ एल्गार छेड़ दिया है। इसके परिणामस्वरूप पिछले सात महीनों से गांव में पूर्ण रूप से शराबबंदी लागू करने में सफलता मिली है। ग्रामसभा के प्रस्ताव तथा ‘मुक्तिपथ-शक्तिपथ’ गांव संगठन के निरंतर प्रयासों से गांव अब नशामुक्ति की राह पर अग्रसर है और यहां शांति व सुव्यवस्था का वातावरण बना है।
पयड़ी गांव बीच में स्थित होने के कारण आसपास के गांवों के लोग यहां शराब पीने के लिए जुटते थे। इससे गांव के युवकों और पुरुषों में नशे की प्रवृत्ति बढ़ गई थी, जिसका सबसे अधिक असर महिलाओं पर पड़ा। उन्हें आर्थिक और सामाजिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। स्थिति बदलने के लिए गांव की महिलाओं ने कमर कसते हुए ‘मुक्तिपथ’ के सहयोग से आंदोलन शुरू किया।
शराब बिक्री पर पाबंदी के लिए महिलाओं ने केवल प्रस्ताव तक सीमित न रहते हुए प्रत्यक्ष कार्रवाई पर जोर दिया। रैली निकालकर गांव में शराब विरोधी जनजागृति की गई। मुख्य चौक पर ‘बाजा बजाओ’ आंदोलन कर विक्रेताओं को चेतावनी दी गई। चेतावनी के बावजूद कारोबार जारी रखने वालों का माल नष्ट किया गया। साथ ही शराब बिक्री बंद न होने पर पुलिस थाने पर मोर्चा निकालने की चेतावनी भी दी गई। इन प्रयासों से गांव से अवैध शराब को बाहर करने में महिलाओं को सफलता मिली है।
इस सफल मुहिम का नेतृत्व पुलिस पटेल देवांगना वासनिक ने किया। उनके साथ शक्तिपथ संगठन की सिंधूबाई कुदेशी, गीताबाई चोपडे, बेबीबाई ठलाल और कांताबाई गेडाम सहित बड़ी संख्या में गांव की महिलाएं सहभागी रहीं। पयड़ी के इस सफल मॉडल की व्यापक सराहना हो रही है और यह अन्य गांवों के लिए आदर्श बन रहा है। पाबंदी स्थायी बनी रहे, इसके लिए मुक्तिपथ के तहसील संगठक राहुल महाकुलकर, उपसंगठक भास्कर कड्यामी और उनकी टीम लगातार प्रयास कर रही है।