रोहित पवार व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (सोर्स: सोशल मीडिया)
Rohit Pawar Wrote Letter To PM Narendra Modi: महाराष्ट्र की राजनीति में उस वक्त हड़कंप मच गया जब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद चंद्र पवार गुट) के विधायक रोहित पवार ने दिवंगत नेता अजित पवार की मौत को लेकर गंभीर सवाल उठाए। रोहित पवार ने इस पूरे मामले को महज एक दुर्घटना मानने से इनकार करते हुए इसमें गहरी साजिश होने की आशंका जताई है। उन्होंने इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर मामले की निष्पक्ष जांच होने तक केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू के इस्तीफे की मांग की है।
रोहित पवार का आरोप है कि इस मामले में साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की जा सकती है। उन्होंने अपने पत्र में स्पष्ट रूप से कहा कि जब तक संबंधित मंत्री अपने पद पर बने रहेंगे, तब तक मामले की पारदर्शिता के साथ जांच संभव नहीं है। उन्होंने आशंका व्यक्त की कि विमान का वॉयस रिकॉर्डर (VCR) नष्ट किया जा सकता है या डेटा के साथ मैनिपुलेशन (हेरफेर) हो सकता है। रोहित पवार ने यह भी दावा किया कि इसमें टीडीपी (TDP) कोटे के नेता शामिल हैं और शक्तिशाली ताकतों द्वारा वीसीआर कंपनी को बचाने की कोशिश की जा रही है।
अजितदादांच्या विमान अपघातासंदर्भात अनेक गंभीर प्रश्न समोर येत असून काही प्रश्न हे थेट त्यांच्या पक्षाच्या काही केंद्रीय नेत्यांशी, राज्य पातळीवरील सत्तेतील नेत्यांशी आणि बडे उद्योगपती यांच्याशी निगडीत असून हे सर्वजण VSR कंपनीशी संबंधित आहेत. या सर्व प्रश्नांची निष्पक्षपणे उकल… pic.twitter.com/YRp16TMNqa — Rohit Pawar (@RRPSpeaks) February 21, 2026
बता दें कि 28 जनवरी 2026 को बारामती एयरपोर्ट पर लैंडिंग के दौरान अजित पवार का निजी विमान रनवे के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। इस भीषण हादसे में प्लेन में आग लग गई थी, जिसमें अजित पवार के साथ पायलट और क्रू मेंबर सहित कुल 5 लोगों की जान चली गई थी। रोहित पवार का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी और अजित पवार के बीच करीबी संबंध थे, इसलिए उन्हें उम्मीद है कि पीएम मोदी और अमित शाह ही इस मामले में सही न्याय दिला सकते हैं।
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अजित पवार के निधन के कुछ ही दिनों बाद, 31 जनवरी को उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार को महाराष्ट्र का उपमुख्यमंत्री बनाया गया था। अब रोहित पवार द्वारा इस हादसे को साजिश बताए जाने और सीधे केंद्र सरकार के मंत्री का इस्तीफा मांगे जाने से राज्य और केंद्र की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। रोहित पवार ने जोर देकर कहा है कि जब तक मंत्री पद नहीं छोड़ेंगे, तब तक यह पता नहीं चल पाएगा कि वास्तव में क्या मैनिपुलेशन हुआ है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि प्रधानमंत्री कार्यालय इस पत्र पर क्या प्रतिक्रिया देता है।