खरीदी केंद्र में रखा धान (सोर्स: सोशल मीडिया)
Gadchiroli Paddy Procurement Center: गड़चिरोली जिले की एटापल्ली तहसील के हेडरी, गेदा, तोडसा, कसनसूर, घोडसूर, पिपली बुर्गी, जारावंडी, कुरूमवाडा तथा एटापल्ली यह धान खरीदी केंद्र बिते खरीफ सीजन के धान खरीदी के लिए शुरू किए गए थे। इन केंद्रो पर आदिवासी विविध कार्यकारी संस्था मार्फत करोड़ों रुपयों का धान किसानों द्वारा खरीदी किया गया। लेकिन यह धान खुले में ही रखा गया।
किसी भी केंद्र पर अधिकृत गोडाऊन की व्यवस्था नहीं किए जाने से केवल तिरपाल के सहारे धान को ढककर रखा गया। लेकिन आंधी-तुफानी बारिश में यह धान सुरक्षित नहीं रह पाया। जिससे व्यापक मात्रा में धान अंकुरित हुआ है और सड़ने की प्रक्रिया शुरू हुई है। किसानों द्वारा व्यापक मेहनत उगाई गई उपज ऐसी बर्बाद हो रही है।
अब नए सीजन में धान कटाई तथा कुटाई को शुरूआत हुई है। किसानों ने नए सीजन का धान संकलित करना शुरू किया है। लेकिन बिते वर्ष का धान अब भी केंद्र पर पड़ा है। जिससे किसान गंभीर संकट में फंसे है। पुराने धान की उंचल नहीं होने से इस वर्ष का धान कहां बेचे, ऐसा सवाल किसानों के समक्ष निर्माण हुआ है।
सरकार ने किसानों द्वारा धान खरीदी कर जिम्मेदारी पूर्ण करने का दांवा किया जा रहा है, लेकिन प्रत्यक्ष में धान संग्रहण की व्यवस्था में घोर अनदेखी हुई है। महामंडल तथा स्थानीय संस्थाओं के अनदेखी के कारण यह नुकसान होने की बात कहीं जा रही है।
आदिवासी विकास महामंडल के समर्थन मूल्य धान खरीदी केंद्र पर किसानों से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी किया जाता है। किसानों को धान का उचित दाम मिले इस उद्देश से सरकार द्वारा समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी करता है। लेकिन गोडाऊन के अभाव में धान भिगने के कारण खराब हो रहा है। इसके कारण सरकार के करोडों रुपए की बर्बादी हो रही है।
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कुछ स्थानों पर अधिक धान दिखाया जाता है। बाद में बरसात का अनुमान लेकर उचल प्रक्रिया में विलंब किया जाता है। धान भिगने या खराब होने पर नुकसान के कारण दिखाकर सरकार के मुआवजा लेने की बात भी कहीं जा रही है। जिले में धान खरीदी में हेराफेरी के मामले उजागर हुए हैं।
गड़चिरोली जिले में आदिवासी विकास महामंडल के माध्यम से समर्थन मूल्य धान खरीदी केंद्र पर धान उपज की खरीदी की जाती है। जिससे किसान व्यापक मेहनत से उगाया धान महामंडल को बेचते है। लेकिन अनेक धान खरीदी केंद्र पर गोडाऊन का अभाव होने से धान तिरपाल के सहारे रखा जाता है।
वहीं समय पर धान उपज उठाएं नहीं जाने के कारण खरीदी केंद्र पर रखा धान खराब होता है। यह स्थिति जिले में अनेक धान खरीदी केंद्र पर दिखाई देती है। लेकिन सरकार व प्रशासन का इस ओर ध्यान नहीं है। जिससे किसानों की मेहनत का कोई मोल नहीं होने की स्थिति दिखाई दे रही है।