रिश्वतखोरी मामला: मंत्री कार्यालय सील, मंत्रालय में मचा हड़कंप, महायुति सरकार पर विपक्ष का हमला
Maharashtra Bribery Case: महाराष्ट्र के एफडीए मंत्रालय में एसीबी की कार्रवाई में एक क्लर्क को रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया, जिसके बाद मंत्री कार्यालय सील होने का सिलसिला तेज हो गया है।
- Written By: आंचल लोखंडे
ACB action Mumbai (सोर्सः सोशल मीडिया)
FDA Ministry Maharashtra: महाराष्ट्र की महायुति सरकार को गुरुवार रात बड़ा झटका लगा, जब अन्न एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) मंत्रालय में तैनात एक क्लर्क को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की टीम ने मंत्रालय परिसर में छापा मारकर रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया। बताया जा रहा है कि मंत्रालय में एसीबी की यह अब तक की पहली सीधी कार्रवाई है। इस घटना से राज्य सरकार और विशेष रूप से राकांपा (अजीत पवार गुट) को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है।
मंत्रालय में हुए इस कथित रिश्वतखोरी प्रकरण के बाद सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के साथ-साथ विपक्षी दलों में भी आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। एक ओर कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले ने मंत्री नरहरी झिरवल के प्रति सहानुभूति जताई है, वहीं वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने सख्त कार्रवाई की मांग की है।
35 हजार रुपये में तय हुआ सौदा
आरोप है कि एसीबी के शिकंजे में फंसे क्लर्क राजेंद्र ढेरंगे ने एक शिकायतकर्ता का मेडिकल लाइसेंस निलंबन रद्द करने के एवज में 50 हजार रुपये की मांग की थी। बाद में 35 हजार रुपये में सौदा तय हुआ। गुरुवार शाम करीब 6 बजे जैसे ही ढेरंगे ने अपने कार्यालय में यह राशि स्वीकार की, एसीबी टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया और मौके पर कार्यालय को सील कर दिया। इस कार्रवाई के बाद एफडीए विभाग के मंत्री नरहरी झिरवल की भूमिका को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। एसीबी गिरफ्तार कर्मचारी और संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों के कॉल रिकॉर्ड तथा दस्तावेजों की जांच कर रही है।
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कांग्रेस का हमला
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने सोशल मीडिया पर बयान जारी करते हुए कहा, “राज्य के एफडीए मंत्री नरहरी झिरवल के कार्यालय के कर्मचारी को मंत्रालय में रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा गया। इसके बाद भ्रष्टाचार निरोधक विभाग ने मंत्री कार्यालय सील कर दिया। इस घटना ने राज्य सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाया है। जांच के दौरान कर्मचारी द्वारा वरिष्ठों के कहने पर रिश्वत लेने का दावा और भी गंभीर मामला है। मंत्री झिरवल और उनके कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों की गहन जांच होनी चाहिए।”
अन्य नेताओं की प्रतिक्रिया
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नाना पटोले ने अलग दृष्टिकोण से सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया, “नरहरी झिरवल एक आदिवासी नेता हैं, इसलिए उनके कार्यालय को निशाना बनाया गया। सरकार के कई विभागों में भ्रष्टाचार है, लेकिन यह कार्रवाई चयनात्मक प्रतीत होती है।” कांग्रेस नेता यशोमती ठाकुर ने भी इस मामले को राजनीतिक साजिश करार देते हुए कहा कि “यह टक्केवारी (प्रतिशत) की सरकार है और नरहरी झिरवल को बदनाम करने का प्रयास किया जा रहा है।”
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महायुति में भी मतभेद
शिवसेना (शिंदे गुट) के मंत्री संजय शिरसाट ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “यदि मंत्रालय में ही रिश्वत ली जा रही है तो यह गंभीर चिंता का विषय है। ऐसे भ्रष्ट कर्मचारियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए।”
मंत्री का पक्ष
विरोधियों के बढ़ते दबाव के बीच मंत्री नरहरी झिरवल ने सफाई देते हुए कहा,“गिरफ्तार व्यक्ति एक सरकारी कर्मचारी है और उसके कृत्य से मेरा कोई संबंध नहीं है। यदि जांच में मेरे कार्यालय या मुझसे जुड़े किसी भी व्यक्ति की संलिप्तता साबित होती है, तो मैं 100 प्रतिशत इस्तीफा देने को तैयार हूं।” हालांकि, उन्होंने अपने कार्यालय के सील होने के दावे को खारिज किया है।
