नशे के खिलाफ एकजुट हो रहे ग्रामीण, गांव-गांव में गठित हो रही समितियां, नागरिकों में बढ़ रही जनजागृति
Gadchiroli Awareness Program: गड़चिरोली जिले में मुक्तिपथ अभियान के तहत गांव-गांव में नशामुक्ति समितियां गठित की जा रही हैं, महिलाएं और युवा सक्रिय रूप से शराब व गुटखा के खिलाफ जनजागृति की गई।
- Written By: आंचल लोखंडे
नशे के खिलाफ एकजुट हो रहे ग्रामीण (सौजन्यः सोशल मीडिया)
Alcohol Tobacco Ban Movement: गड़चिरोली जिले में शराबबंदी और गुटखाबंदी लागू होने के बावजूद अवैध बिक्री खुलेआम जारी है। नशे की लत के कारण नागरिक प्रत्येक वर्ष करोड़ों रुपये खर्च कर रहे हैं तथा विभिन्न गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। इसी पृष्ठभूमि में महाराष्ट्र सरकार, टाटा ट्रस्ट और गड़चिरोली की सर्च संस्था के संयुक्त उपक्रम अंतर्गत मुक्तिपथ अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के जरिए गांव-गांव में व्यसनमुक्ति का संकल्प करवाया जा रहा है।
विशेष रूप से महिलाएं और युवा वर्ग इस आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं, जिससे गड़चिरोली जिला नशामुक्ति की दिशा में उत्साहजनक कदम बढ़ा रहा है। मुक्तिपथ अभियान के क्रियान्वयन के लिए तहसील स्तर पर तहसील संगठक नियुक्त किए गए हैं, जो प्रत्येक गांव में जनजागृति कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं।
अब तक सैकड़ों गांवों ने व्यसनमुक्ति का संकल्प किया है।
अवैध व्यवसाय पर कार्रवाई
• महिला और युवा समितियों का गठन
• गांवों में शराब व गुटखा बिक्री पर स्वैच्छिक पाबंदी
• शराब विक्रेताओं को पकड़कर पुलिस के हवाले करने की पहल
• गुटखा व तंबाकू की होली जलाकर प्रतीकात्मक विरोध
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इन प्रयासों के चलते कई गांव व्यसनमुक्त होने की राह पर अग्रसर हैं।
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आदिवासी गांवों का समावेश
- नशे के शारीरिक दुष्परिणाम और आर्थिक नुकसान पर गांवों में जनजागृति
- अभियान से प्रेरित होकर आदिवासी परिवारों ने भी नशामुक्ति का संकल्प लिया
- शराबबंदी समितियां गठित कर अवैध बिक्री के विरुद्ध प्रस्ताव पारित
- आदिवासी समाज में जागरूकता का सकारात्मक विस्तार
- अभियान के परिणामस्वरूप अब आदिवासी गांव भी नशे के खिलाफ निर्णायक रूप से आगे आ रहे हैं।
