Nagpur News: बिना संगम में फिर बवाल, अस्थि विसर्जन के दौरान जलती लकड़ियों से हमला, 6 लोग घायल

Bina Sangam Clash: नागपुर के बिना संगम में अस्थि विसर्जन के दौरान परिवार पर हमला बोल दिया। जिसमें 6 लोग घायल हो गए। स्थानीयों ने पुलिस चौकी की मांग की है।
अस्थि विसर्जन के दौरान जलती लकड़ियों से हमला
अस्थि विसर्जन के दौरान जलती लकड़ियों से हमला (सौजन्यः सोशल मीडिया)
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Nagpur Crime News: खापरखेड़ा थाना क्षेत्र के बिना संगम में एक बार फिर विवाद सामने आया, जहां अस्थि विसर्जन कर रहे परिवार पर जलती हुई लकड़ियों से हमला कर दिया गया। घटना में नागपुर निवासी दिलीप डायरे, दिनेश डायरे, बंडू मांढरे, अज्जु दिघोरे, विशाल मांढरे और अर्जुन चाचरकर घायल हो गए।

पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आरोपियों आदित्य तेलघोटे (20) और आयुष तेलघोटे (20) को गिरफ्तार कर लिया, जबकि आशीष गवली, नरेश लोखंडे, गोलू बांगडे, रवि वरठी और साहिल फरार हैं। सभी आरोपी सावित्रीबाई फुले नगर, मानेवाड़ा रोड के निवासी बताए गए हैं। घटना रविवार की है, जब मृतका किसनाबाई डहारे की अस्थि विसर्जन प्रक्रिया पूरी कर परिवार सड़क किनारे बैठा था।

पैर पर पैर रखने पर शुरू हुआ विवाद

जानकारी के अनुसार, पांढराबोडी निवासी विमल करनुके (52) अपने रिश्तेदारों के साथ सीढ़ियों पर बैठे थे। इसी दौरान 20 वर्षीय एक युवक ने विमल के भाई के पैर पर पैर रख दिया। आपत्ति जताने पर विवाद बढ़ गया और युवक ने लात-घूंसों से हमला कर दिया। देखते ही देखते दोनों गुट आमने-सामने हो गए और जलती लकड़ियों से हमला किया गया, जिससे 6 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।

झगड़ों का नया अड्डा बनता जा रहा ‘बिना संगम’

बिना संगम धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। विदर्भ सहित नागपुर जिले के कई परिवार यहां अपने दिवंगत परिजनों की अस्थियां विसर्जित करने आते हैं। लेकिन हाल के वर्षों में यहां नशा, शोर-शराबा और छोटी बातों पर हिंसा की घटनाएं बढ़ गई हैं। कुछ दिन पहले भी लाइटर को लेकर हुए विवाद में एक युवक की मौत हो गई थी और एक अन्य गंभीर घायल हुआ था।

पुलिस चौकी की मांग तेज

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बेहद कमजोर है और असामाजिक तत्वों को कोई भय नहीं रहता। श्रद्धालु और नागरिकों की मांग है कि बिना संगम परिसर में तत्काल पुलिस चौकी स्थापित की जाए, ताकि 24 घंटे निगरानी रहे और ऐसी घटनाओं पर रोक लग सके। अस्थि विसर्जन जैसे संवेदनशील अवसर पर हमला होने से सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

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