Bal Anand Sammelan:गड़चिरोली जिले (सोर्सः सोशल मीडिया)
Zilla Parishad School Gadchiroli: आरमोरी तहसील के कासवी गांव स्थित जिला परिषद स्कूल में बाल आनंद सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन को जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुहास गाडे ने भेंट देकर नौनिहाल विद्यार्थियों से संवाद किया तथा स्कूल से जुड़ी विभिन्न समस्याओं की जानकारी ली। इस अवसर पर सीईओ सुहास गाडे के हाथों बाल आनंद सम्मेलन का उद्घाटन भी किया गया।
श्रम का महत्व, स्वावलंबन की भावना तथा खरीदी-बिक्री के कौशल विकसित करने के उद्देश्य से कासवी की जिला परिषद उच्च प्राथमिक स्कूल में यह बाल आनंद सम्मेलन आयोजित किया गया था। सम्मेलन के दौरान विद्यार्थियों द्वारा लगाए गए स्टॉलों ने छोटे बाजार का स्वरूप धारण कर लिया था।
इस अवसर पर जोगीसाखरा केंद्र प्रमुख कैलाश टेभुर्णे, शाला समिति अध्यक्ष उदाराम दिघोरे, प्रवीण राहाटे, स्कूल समिति उपाध्यक्ष अशोक प्रधान, प्रधानाध्यापक अन्वर शेख, शिक्षक गुरुदास लोणारे, साधना कोटरंगे, गायत्री वालदे, प्रतीक्षा किरमिरे, जागृति आठोले, आंगनवाड़ी सेविका ज्योति कानतोडे सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।
सम्मेलन के दौरान शिक्षक विवेक धोटे के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों रितिक सयाम, पवन पुसाम, चेतन मेश्राम, नैतिक दिघोरे, ओंकार बावणे, युग कांदोर, ऋषिकेश कानतोडे, ज्ञानदीप चहांदे, प्रथम मरसकोल्हे, मयंग बांडे तथा नूतन सयाम द्वारा प्रस्तुत ग्रामीण लोकनृत्य ‘डंडार’ आकर्षण का केंद्र रहा।
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इस अवसर पर जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुहास गाडे ने कहा कि बचपन का जीवन आनंद और सीख से भरा होता है। महाराष्ट्र शासन के शालेय शिक्षा विभाग द्वारा सभी स्कूलों में ‘दप्तरमुक्त शनिवार’ उपक्रम चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों के कंधों से पुस्तकों का बोझ कम कर उन्हें आनंददायी वातावरण में शिक्षा देना और उनके सुप्त गुणों को विकसित करना है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखते हुए कृति-आधारित शिक्षण के माध्यम से विद्यार्थियों के जीवन कौशल विकसित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। ‘दप्तरमुक्त शनिवार’ का अर्थ पढ़ाई से अवकाश नहीं, बल्कि खुशी के साथ सीखने का अवसर है।