जांच समिति गठित करने पर अड़े इंटक नेता (सौजन्यः सोशल मीडिया)
WCL Chandrapur Hospital Scandal: वेकोलि के क्षेत्रीय अस्पताल में एक्सपायरी दवाइयाँ और वैद्यकीय अपशिष्ट को खुले में जलाए जाने के विरोध में राष्ट्रीय कोयला खदान मजदूर संघ (इंटक) ने लालपेठ परिसर स्थित अस्पताल के सामने धरना शुरू कर दिया है। इंटक के महासचिव के. के. सिंह ने इस संबंध में वेकोलि चंद्रपुर क्षेत्र के महाप्रबंधक और अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी को पत्र देकर, घटना की जांच के लिए शीघ्र समिति गठित करने की मांग की है। उन्होंने पत्र में आरोप लगाया है कि वेकोलि चंद्रपुर क्षेत्र में अनियमितताओं, पक्षपात और भ्रष्टाचार का लंबा इतिहास है।
इसी क्रम में एक्सपायरी दवाओं का निष्पादन निर्धारित नियमों के विरुद्ध खुले में किया गया। बताया गया कि ये दवाएँ वर्ष 2018 से स्टॉक में थीं। इंटक नेता सिंह ने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी मात्रा में दवाएँ कैसे और क्यों जमा की गईं? क्या इनके निष्पादन हेतु कोई समिति या प्रक्रिया अपनाई गई थी?
उन्होंने यह भी कहा कि पूरी प्रक्रिया संदिग्ध है और भ्रष्टाचार की ओर इशारा करती है। 25 नवंबर को अस्पताल प्रबंधन ने कुछ ठेका और स्थायी कर्मचारियों को बुलाकर पुराने स्टोर से दवाइयाँ मँगवाईं और देर शाम इन्हें खुले परिसर में जला दिया गया।
अगले दिन भी 15 से अधिक दवाइयों के बक्से जलाए जाने की जानकारी मिली। जलाए गए कचरे को नगरपालिका की कचरा गाड़ी में डलवाया गया। इस मामले में वेकोलि प्रबंधन कटघरे में है, लेकिन अब तक उनकी ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। इंटक महासचिव सिंह ने मांग की है कि जांच समिति में संगठन के सदस्य को शामिल किया जाए।
जहाँ दवाइयाँ जलाई गईं, उसी लालपेठ क्षेत्रीय अस्पताल में 27 नवंबर को अमृत फार्मेसी का उद्घाटन किया गया। इस कार्यक्रम में वणी क्षेत्र के राजीवरतन अस्पताल से डॉ. चौधरी उपस्थित थे।
इंटक नेता सिंह ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि “जब एक अस्पताल में 6 फार्मासिस्ट पहले से मौजूद हैं, ऐसे में इस घटना के तुरंत बाद फार्मेसी का उद्घाटन संदेह पैदा करता है।”
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जानकारी के अनुसार, दवाइयाँ खुले में जलाने की सूचना मिलने पर महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल (MPCB) तथा मनपा स्वच्छता विभाग के अधिकारियों ने निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार की है। निरीक्षण के दौरान वेकोलि अस्पताल के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा असहयोग की शिकायत भी सामने आई है। मामला मंत्रालय तक पहुँच गया है और उच्च स्तर पर कड़ी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।