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तीसरे विश्व युद्ध की दस्तक! चीन ने समंदर में खड़ा किया ‘जहाजों का ब्रेकर’, ताइवान और जापान की बड़ी घेराबंदी
- Written By: अमन उपाध्याय
China War Preparation: पूर्वी चीन सागर से आई सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि चीन ने 2000 जहाजों के जरिए 400 किमी लंबी दीवार बनाकर ताइवान, जापान और फिलीपींस की घेराबंदी का अभ्यास किया है।

चीन ने समंदर में खड़ा किया 'जहाजों का ब्रेकर', फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Japan Taiwan China Tension: एक तरफ जहां मिडिल ईस्ट में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच महायुद्ध छिड़ा हुआ है, वहीं दूसरी ओर एशिया के दूसरे छोर पर चीन एक बड़ी जंग की तैयारी करता नजर आ रहा है। पूर्वी चीन सागर (East China Sea) से आई ताजा सैटेलाइट तस्वीरों ने वैश्विक रणनीतिकारों की नींद उड़ा दी है। इन तस्वीरों से खुलासा हुआ है कि चीन ने समंदर के बीचों-बीच 400 किलोमीटर लंबा ‘जहाजों का ब्रेकर’ तैयार किया है, जिसे ताइवान, जापान और फिलीपींस जैसे दुश्मन देशों की घेराबंदी के तौर पर देखा जा रहा है।
2000 जहाजों का रहस्यमयी चक्रव्यूह
नासा और ‘ingeniSPACE’ द्वारा जारी सैटेलाइट इमेजरी के अनुसार, चीन ने लगभग 2000 मछली पकड़ने वाले जहाजों को एक विशेष ‘ज्योमेट्रिकल शेप’ में तैनात किया है।, यह तैनाती दिसंबर 2025 में देखी गई थी, जिसका विश्लेषण अब सामने आया है। जानकारों का कहना है कि यह कोई सामान्य मछली पकड़ने की गतिविधि नहीं, बल्कि एक सुनियोजित सैन्य युद्धाभ्यास है।, इन जहाजों को इस तरह से जमाया गया है कि वे एक अभेद्य दीवार की तरह काम कर सकें जिससे युद्ध की स्थिति में दुश्मन देशों की नौसैनिक आवाजाही को पूरी तरह ब्लॉक किया जा सके।
ताइवान, जापान और फिलीपींस पर संकट
विशेषज्ञों के मुताबिक, चीन के इस ‘ब्रेकर’ के निशाने पर मुख्य रूप से तीन देश हैं ताइवान, जापान और फिलीपींस। पूर्वी चीन सागर में इन देशों के साथ चीन का पुराना क्षेत्रीय विवाद है। ingeniSPACE के जेसन वांग ने इस तैनाती को ‘असामान्य’ करार देते हुए कहा कि मछली पकड़ने वाली नावें आमतौर पर इस तरह के जटिल पैटर्न में जमा नहीं होती हैं। ऑस्ट्रेलिया की पूर्व नौसैनिक युद्ध अधिकारी जेनिफर पार्कर ने इसे स्पष्ट रूप से एक सैन्य युद्धाभ्यास बताया है, जिसका उद्देश्य क्षेत्रीय संकट की स्थिति में समंदर के रास्तों पर कब्जा करना है।,
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मछली पकड़ने वाले जहाजों का ही इस्तेमाल क्यों?
चीन द्वारा इस अभ्यास में केवल मछली पकड़ने वाले जहाजों के इस्तेमाल के पीछे दो बड़ी रणनीतियां बताई जा रही हैं।
ब्लॉकेड की क्षमता: युद्ध के समय ये छोटे और फुर्तीले जहाज किसी भी बड़े युद्धपोत के रास्ते में रुकावट पैदा करने के लिए सबसे प्रभावी उपकरण साबित हो सकते हैं।
इनकार की रणनीति : चीन दुनिया के सामने यह दावा कर सकता है कि वह केवल मछली पकड़ने का काम कर रहा है, न कि किसी हमले की तैयारी। वाशिंगटन स्थित ‘सीएसआईएस’ के निदेशक ग्रेगरी पोलिंग ने भी स्वीकार किया है कि उन्होंने पहले कभी इतनी बड़ी संख्या में जहाजों का ऐसा जमावड़ा नहीं देखा।
यह भी पढ़ें:- परमाणु युद्ध की दहलीज पर दुनिया! ईरान ने तुर्किये में US बेस पर दागी मिसाइलें, युद्धपोत पर भी हमले का दावा
वैश्विक अस्थिरता और भारत पर असर
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब दुनिया पहले ही ईरान-इजरायल संघर्ष और लाल सागर में तेल आपूर्ति के संकट से जूझ रही है। चीन की यह आक्रामकता हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति के लिए बड़ा खतरा है। यदि चीन पूर्वी चीन सागर को ब्लॉक करने में सफल रहता है, तो इसका सीधा असर वैश्विक व्यापार और भारत जैसे देशों की तेल आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।
China prepares major war 400km ship breaker east china sea
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