
आदिवासी छात्रों के लिए छात्रवृत्ति (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Foreign Education for ST Students: अनुसूचित जनजाति वर्ग के विद्यार्थियों को विदेश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर उपलब्ध कराने तथा उनकी प्रतिभा को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के उद्देश्य से आदिवासी विकास विभाग द्वारा विदेश अध्ययन छात्रवृत्ति योजना संचालित की जा रही है। शैक्षणिक वर्ष 2026-27 के लिए इस योजना के अंतर्गत 40 मेधावी आदिवासी विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति प्रदान की जाएगी।
इच्छुक एवं पात्र विद्यार्थियों से ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। इस योजना के तहत विदेशी विश्वविद्यालयों में प्रवेश प्राप्त करने वाले अनुसूचित जनजाति के 40 विद्यार्थियों को शैक्षणिक खर्च हेतु आर्थिक सहायता दी जाएगी।
छात्रवृत्ति में ट्यूशन फीस, परीक्षा शुल्क, रहने व भोजन के लिए निर्वाह भत्ता, शैक्षणिक आकस्मिक व अन्य खर्च, हवाई यात्रा व्यय, वीजा शुल्क तथा स्वास्थ्य बीमा शामिल रहेगा। शैक्षणिक आकस्मिक खर्च के लिए अमेरिका व अन्य देशों (यूके को छोड़कर) हेतु प्रतिवर्ष 1500 अमेरिकी डॉलर तथा यूके के लिए 1100 जीबीपी प्रदान किए जाएंगे।
लाभार्थी विद्यार्थियों के परिवार की वार्षिक आय सीमा 8 लाख रुपये निर्धारित की गई है तथा संबंधित विश्वविद्यालय का क्यूएस वर्ल्ड रैंकिंग में स्थान 200 के भीतर होना अनिवार्य है। यदि निर्धारित निकषों के अनुसार पर्याप्त विद्यार्थी उपलब्ध नहीं होते हैं, तो आय सीमा 10 लाख रुपये तक शिथिल की जाएगी और क्यूएस रैंकिंग सीमा 200 से बढ़ाकर क्रमशः 300 तक मान्य की जाएगी। विदेश में अध्ययन हेतु आवश्यक TOEFL या IELTS जैसी प्रवेश परीक्षाएं उत्तीर्ण करना भी अनिवार्य है।
छात्रवृत्ति योजना का लाभ लेने के लिए निर्धारित प्रारूप में आवेदन [https://fs.maharashtra.gov.in](https://fs.maharashtra.gov.in) इस आधिकारिक वेबसाइट पर भरना होगा। आवेदन केवल ऑनलाइन माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे। चयन समिति द्वारा सभी पात्र आवेदनों की जांच कर अंतिम चयन किया जाएगा। योजना की विस्तृत जानकारी के लिए विद्यार्थियों को अधिकृत वेबसाइट पर संपर्क करने का आवाहन आदिवासी विकास विभाग द्वारा किया गया है।
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विद्यार्थी अनुसूचित जनजाति वर्ग का तथा महाराष्ट्र राज्य का निवासी होना चाहिए। स्नातकोत्तर डिग्री एवं स्नातकोत्तर डिप्लोमा पाठ्यक्रमों के लिए अधिकतम आयु सीमा 35 वर्ष तथा पीएचडी पाठ्यक्रम के लिए 40 वर्ष निर्धारित है। राज्य के अनुसूचित जनजाति विद्यार्थियों को विदेश में पीएचडी, स्नातकोत्तर डिग्री तथा स्नातकोत्तर डिप्लोमा पाठ्यक्रमों के अध्ययन हेतु प्रतिवर्ष छात्रवृत्ति प्रदान की जाती है।
जिससे आदिवासी विद्यार्थियों के उच्च शिक्षा के सपनों को नई दिशा मिलती है। शैक्षणिक वर्ष 2026–27 में 40 विद्यार्थियों का चयन किया जाएगा। इच्छुक विद्यार्थियों से शीघ्र ऑनलाइन आवेदन करने का आवाहन आदिवासी विकास विभाग की आयुक्त लीना बनसोड ने किया है।






