health department action (सोर्सः सोशल मीडिया)
Bengali Doctors Fraud: ग्रामीण क्षेत्रों की सीमाएं पार कर अब शहरों के गली-चौराहों तक बोगस डॉक्टर, वैद्य और तथाकथित बंगाली वैद्य तेजी से बढ़ रहे हैं। बिना किसी मान्यता प्राप्त चिकित्सकीय डिग्री के ये झोलाछाप डॉक्टर पीलिया, बवासीर, लैंगिक समस्याओं से लेकर कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के ‘गारंटीड’ इलाज का दावा कर लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं।
पिछले एक वर्ष में जिले में ऐसे 8 बोगस डॉक्टरों के खिलाफ शिकायतें प्रशासन तक पहुंची हैं, जिनमें से 3 मामलों में अपराध दर्ज किया गया है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने इन झोलाछापों के नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं, लेकिन यह स्पष्ट किया है कि इनमें कुछ तथाकथित बंगाली डॉक्टर भी शामिल हैं।
इन मामलों में नागभीड़ तालुका के काम्पा क्षेत्र के एक और वरोरा तालुका के खांबाड़ा क्षेत्र के दो बोगस डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। जिले में यह चर्चा है कि प्रशासन की नजरों से बचकर कई झोलाछाप डॉक्टर खुलेआम अपना धंधा चला रहे हैं। जांच में यह सामने आया है कि इन झोलाछापों के पास कोई वैध चिकित्सकीय डिग्री नहीं होती।
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कई बार ये लोग फर्जी या पुरानी डिग्रियों के बोर्ड लगाकर मरीजों को भ्रमित करते हैं। कुछ मामलों में प्रतिष्ठित डॉक्टरों के यहां कंपाउंडर के रूप में काम कर चुके लोग भी अपने अवैध क्लीनिक चला रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, गुप्त रूप से दवाइयां देना, पुड़ियों में दवा बांधकर देना और क्लीनिक में वैध प्रमाणपत्रों का अभाव ये सभी झोलाछाप डॉक्टरों की पहचान हैं। ऐसे लोगों से इलाज कराना बेहद जोखिम भरा है।
चंद्रपुर जिला स्वास्थ्य अधिकारी (DHO) डॉ. अशोक कटारे ने कहा कि जिले के बोगस डॉक्टरों के खिलाफ हमने अभियान तेज कर दिया है। तालुका स्तर पर गटविकास अधिकारी की अध्यक्षता में विशेष समितियां बनाई गई हैं। शिकायत मिलने पर यदि कोई झोलाछाप रंगे हाथ पकड़ा जाता है, तो उसके खिलाफ मामला दर्ज किया जाता है। किसी भी झोलाछाप को बख्शा नहीं जाएगा।