Bhandara News: नगर परिषद के तीन स्वीकृत सदस्यों के नाम अब तक गजट में प्रकाशित नहीं

Bhandara-Gondia Politics: तुमसर नगर परिषद के तीन स्वीकृत सदस्यों के नाम गजट में प्रकाशित न होने से मामला मंत्रालय में अटका है और भाजपा व अन्य दलों के बीच राजनीतिक खींचतान तेज हो गई है।
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Tumsar municipal council (सोर्सः सोशल मीडिया)
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Tumsar Municipal Council: नगर परिषद के स्वीकृत सदस्यों के नामों का गजट में प्रकाशन न होना इन दिनों स्थानीय राजनीति का एक पेचीदा और चर्चित मुद्दा बना हुआ है। हाल ही में नगराध्यक्ष द्वारा आयोजित पत्रवार्ता में यह कहा गया था कि उनके द्वारा लिया गया निर्णय पूरी तरह सही था, लेकिन इसके बावजूद आज तक तीन स्वीकृत सदस्यों के नाम गजट में प्रकाशित नहीं हो सके हैं। इससे कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

वर्तमान में भंडारा-गोंदिया जिले की राजनीति में यह चर्चा आम है कि भाजपा विधायक डॉ. परिणय फुके की मंशा के अनुरूप ही अधिकांश निर्णय लिए जाते हैं। स्वीकृत सदस्य पद के लिए भाजपा की ओर से विधायक फुके के निर्देश पर केवल अभिषेक कारेमोरे के नाम की सिफारिश की गई थी। इसके विपरीत, नगराध्यक्ष ने उस सिफारिश की अनदेखी करते हुए अपनी ओर से तीन स्वीकृत सदस्यों के नाम घोषित कर दिए।

राजनीतिक खींचतान तेज

इन नामों को मंजूरी के लिए जिलाधिकारी के पास भेजा गया, लेकिन जिलाधिकारी ने स्वीकृत सदस्य चयन प्रक्रिया को अवैध करार देते हुए इस पर रोक लगाने की सिफारिश राज्य सरकार से की। इसी कारण यह पूरा प्रकरण फिलहाल मंत्रालय स्तर पर अधर में लटका हुआ है और गजट प्रकाशन की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है।

प्रशासनिक और सत्ता समीकरण

विधायक डॉ. परिणय फुके को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का करीबी माना जाता है और नगर विकास विभाग तथा मंत्रालय स्तर पर उनकी पकड़ मजबूत बताई जाती है। ऐसे में यदि स्वीकृत सदस्यों के नाम गजट में अटके हुए हैं, तो इसके पीछे केवल तकनीकी कारण ही नहीं, बल्कि ‘पसंदीदा नामों’ पर सहमति न बन पाना भी एक बड़ा कारण माना जा रहा है। विधायक फुके का प्रयास रहेगा कि भाजपा द्वारा सुझाए गए नाम को ही स्वीकृत सदस्य के रूप में प्राथमिकता मिले।

मंत्रालय में अधर में लटका मामला

दूसरी ओर, विधायक राजू कारेमोरे स्थानीय विधायक हैं और नगर परिषद क्षेत्र उनके निर्वाचन क्षेत्र का अहम हिस्सा है। वे अजित पवार गुट से जुड़े हैं और नगराध्यक्ष के करीबी माने जाते हैं। हालांकि, राज्य स्तर पर सीमित प्रभाव के कारण उन्हें अपने समर्थकों के नाम गजट में प्रकाशित करवाने के लिए अधिक संघर्ष करना पड़ रहा है।

स्वीकृत सदस्य का पद केवल सम्मान का विषय नहीं, बल्कि नगर परिषद के राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित करने वाला महत्वपूर्ण कारक होता है। जिस विधायक के समर्थकों के नाम गजट में प्रकाशित होंगे, स्थानीय राजनीति में उसी का वर्चस्व माना जाएगा। प्रशासनिक पहुंच और मंत्रालय स्तर पर लॉबिंग के मामले में विधायक परिणय फुके को बढ़त मिलने की संभावना जताई जा रही है।

राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि गजट में नामों का प्रकाशन न होना दोनों नेताओं के बीच ‘ईगो वॉर’ या सीटों के बंटवारे को लेकर बने गतिरोध का संकेत है। फिलहाल यह देखना अहम होगा कि मंत्रालय से किस पक्ष की सूची को पहले ‘ग्रीन सिग्नल’ मिलता है, क्योंकि वही पक्ष इस सियासी मुकाबले में भारी पड़ता नजर आएगा।

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