शपथपत्र करारनामा मुहिम: 107 नगरसेवक प्रत्याशियों में से 57 और 9 नगराध्यक्ष में से 6 ने किए हस्ताक्षर
Shapathpatra Kararnama: साकोली-सेंदूरवाफा क्षेत्र में "शपथपत्र करारनामा" मुहिम का समापन, 57 नगरसेवक और 6 नगराध्यक्ष उम्मीदवारों ने जनहित शपथपत्र पर किए हस्ताक्षर।
- Written By: आंचल लोखंडे
शपथपत्र करारनामा मुहिम (सौजन्यः सोशल मीडिया)
Sakoli Municipal Council: साकोली-सेंदूरवाफा क्षेत्र के जागरूक मतदाता, वीआयपी ग्रुप साकोली मीडिया और फ्रीडम यूथ फाउंडेशन द्वारा संयुक्त रूप से चलाई गई बहुचर्चित “शपथपत्र करारनामा” मुहिम का समापन समारोह 30 नवंबर को संत श्री लहरीबाबा मठ देवस्थान में संपन्न हुआ। इस अवसर पर नगराध्यक्ष पद की 6 महिला उम्मीदवारों ने जनहित में तैयार किए गए शपथपत्र करारनामे पर हस्ताक्षर किए।
इस मुहिम में लगातार फोन, संदेश और चार बार याद दिलाए जाने के बावजूद कुछ नगरसेवक पद के उम्मीदवार अनुपस्थित रहे, जिसके कारण नागरिकों में सवाल उठने लगे। कई लोगों ने उनकी अनुपस्थिति पर शंका व्यक्त की। समापन समारोह में नगराध्यक्ष उम्मीदवार उपस्थित होकर उत्साहपूर्वक करारनामे पर हस्ताक्षर किए।
स्थानीय मतदाता उपस्थित
समारोह में प्रतिष्ठित नागरिक डॉ. केशव कापगते, प्रा. हरीशचंद्र सोनवाने, इंजी. प्रसन्न गुप्ता, सेवानिवृत्त शिक्षक बी.एम. फुलबांधे सहित बड़ी संख्या में स्थानीय मतदाता उपस्थित थे। कार्यक्रम का आयोजन वीआयपी ग्रुप के अध्यक्ष अनिल कापगते, मीडिया के आशीष चेडगे, अंकित कापगते, मुकेश पंचभाई, मनीषा काशिवार, जगिया, मदन कमाने, निलय झोडे, यशवंत कापगते, छगन दोनोडे, गोपिचंद लांडेकर आदि ने किया।
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कुछ उम्मीदवारों की अनुपस्थिति पर चर्चाएं तेज
8 दिनों तक चली इस मुहिम में कुल 57 नगरसेवक/नगरसेविका उम्मीदवार और 6 नगराध्यक्ष उम्मीदवारों ने 500 रुपये के स्टांप पेपर पर जनहित के शपथपत्र पर हस्ताक्षर किए। हालांकि, कुछ प्रभागों के उम्मीदवारों की अनुपस्थिति पर शहर में चर्चाएं तेज हैं।
शपथपत्र में यह घोषणा ली गई कि, “नगरसेवक/नगरसेविका या नगराध्यक्ष बनने के बाद किसी भी प्रकार की ठेकेदारी, कमीशनखोरी या भ्रष्टाचार नहीं करेंगे। यदि जनता को ऐसा कुछ मिलता है, तो हमारे खिलाफ मामला दर्ज कर हमसे इस्तीफा लिया जा सकेगा।”
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जिलावासियों का कहना है कि इस मुहिम को जिस तरह का प्रतिसाद मिला है, वह न केवल जिले बल्कि पूरे महाराष्ट्र में एक मिसाल बन सकता है। इसे राज्य के राजनीतिक इतिहास की एक उल्लेखनीय पहल माना जा रहा है।
