प्लास्टिक से मवेशियों की जान को खतरा, नगर परिषद प्रशासन की अनदेखी के कारण समस्या ने लिया विकराल रूप
Plastic Ban: मवेशी भोजन की तलाश में सड़कों के किनारे जमा कचरे में मुंह मारते हैं। कचरे में अक्सर प्लास्टिक, पॉलिथीन और सड़े-गले खाद्य पदार्थ पड़े रहते हैं।
- Written By: आंचल लोखंडे
प्लास्टिक से मवेशियों की जान को खतरा (सौजन्यः सोशल मीडिया)
Bhandara News: शहर में आवारा मवेशियों का सड़कों पर घूमना अब आम दृश्य बन गया है। ये मवेशी दिनभर गलियों और मुख्य सड़कों पर भटकते हुए दिखाई देते हैं। राहगीरों के लिए यह न केवल असुविधाजनक स्थिति है, बल्कि यातायात व्यवस्था पर भी इसका असर पड़ रहा है। सबसे बड़ी चिंता का विषय यह है कि ये मवेशी भोजन की तलाश में सड़कों के किनारे जमा कचरे में मुंह मारते हैं। कचरे में अक्सर प्लास्टिक, पॉलिथीन और सड़े-गले खाद्य पदार्थ पड़े रहते हैं।
भोजन की तलाश में मवेशी प्लास्टिक और गंदगी के साथ ही यह सब खा जाते हैं। चिकित्सकों के अनुसार, प्लास्टिक मवेशियों के शरीर में जाने पर पचता नहीं है, जिससे आंतों में रुकावट पैदा होती है। धीरे-धीरे यह गंभीर रोग का रूप ले लेता है और कई बार मवेशियों की मौत भी हो जाती है। इस तरह प्लास्टिक न केवल पर्यावरण के लिए खतरा है बल्कि पशुओं के जीवन पर भी संकट बनकर मंडरा रहा है।
स्वास्थ्य के लिए घातक
दूसरी ओर, सड़े-गले भोजन और गंदगी से निकलने वाली दुर्गंध से आसपास के दुकानदारों और राहगीरों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। जहां-जहां कचरे के ढेर हैं, वहां मक्खियों और मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। इससे स्वास्थ्य संबंधी खतरे भी उत्पन्न हो रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नगर परिषद प्रशासन की अनदेखी के कारण यह समस्या विकराल रूप धारण कर चुकी है। कचरा समय पर न उठाए जाने और कचरा प्रबंधन की उचित व्यवस्था न होने से मवेशी खुलेआम कचरे पर टूट पड़ते हैं।
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बीमारियां फैलने का खतरा
शहरवासियों ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि यही स्थिति बनी रही तो बीमारियां फैलने का खतरा और अधिक बढ़ जाएगा। नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि सबसे पहले कचरा निपटान की उचित व्यवस्था की जाए। शहर में निर्धारित स्थानों पर ही कचरा डाला जाए और नियमित सफाई हो। साथ ही प्लास्टिक के उपयोग पर सख्ती से रोक लगाई जाए, ताकि यह मवेशियों तक न पहुंचे।
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प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल
नागरिकों ने यह भी सुझाव दिया कि आवारा मवेशियों की देखभाल के लिए गौशालाओं की संख्या बढ़ाई जाए। उन्हें खुले में भटकने देने की बजाय सुरक्षित स्थानों पर रखा जाए। इससे जहां मवेशियों का जीवन सुरक्षित होगा, वहीं शहर की स्वच्छता व्यवस्था में भी सुधार आएगा। भंडारा जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर में इस प्रकार की समस्या प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है।
