मोगरकसा बाघ शावक मृत्यु (सौजन्य-नवभारत)
Tiger Death Probe: नागपुर जिले के मोगरकसा संरक्षण क्षेत्र और उससे सटे भंडारा जिले के लेंडेझरी संरक्षण क्षेत्र में एक बाघिन के शावक के मृत पाए जाने के मामले ने वनविभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पहले दिन पर्यटक को शावक का शव मिलने और दूसरे दिन उसका केवल एक पैर मिलने से यह मामला और भी संदिग्ध हो गया।
इसके बाद भंडारा, गोंदिया और नागपुर जिलों के मानद वन्यजीव रक्षकों ने मुख्य वन संरक्षक नागपुर से इस पूरे प्रकरण की गहन जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य वन संरक्षक नागपुर श्रीलक्ष्मी ने छह सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है। इस समिति में नितेश देवगड़े, विभागीय वन अधिकारी (विजिलनस), मनोज मोहिते, सहायक वन संरक्षक- काटोल, अरुण पेंदोरकर, वन परिक्षेत्र अधिकारी फ्लाइंग स्क्वाड नागपूर के साथ नागपुर के मानद वन्यजीव रक्षक अविनाश लोंढे को शामिल किया गया है।
चूंकि जहां लाश मिली वह लवादा-2 कक्ष क्रमांक 36 लेंडेझरी वन परिक्षेत्र भंडारा वन विभाग के अंतर्गत आता है, इसलिए भंडारा स्तर से सहायक वन संरक्षक रितेश भोंगाडे तथा मानद वन्यजीव रक्षक शाहिद खान को इस समिति में शामिल किया गया है। समिति जल्द ही घटनास्थल का दौरा कर जांच करेगी।
मानव वन्यजीव रक्षकों की शिकायत के अनुसार रविवार 21 दिसंबर को शाम करीब साढ़े तीन बजे प्रतिबंधित पर्यटन क्षेत्र लेंडेझरी के कंपार्टमेंट क्रमांक 36 में पर्यटक हार्दिक राठोड को बाघिन के शावक का शव मिला। कुछ ही दिनों पहले इस बहुत कम उम्र के शावक का उसकी मां के साथ वीडियो और फ़ोटो वायरल हुआ था।
वास्तव में जहां शव मिला यह क्षेत्र पर्यटन के लिए पूरी तरह निषिद्ध है। ऐसे में पर्यटक हार्दिक राठोड़ वहां कैसे पहुंचे, यह बड़ा सवाल बना हुआ है। आरोप है कि हार्दिक राठोड़ ने जिप्सी चालक और गाइड को इस मामले में किसी भी प्रकार की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को न देने की हिदायत दी थी।
अगले दिन स्थानीय टूर ऑपरेटर ऋतुराज जयस्वाल ने मृत शावक की तस्वीरें मुख्य वन संरक्षक नागपुर श्रीलक्ष्मी को व्हाट्सएप के माध्यम से भेजीं। इसके बाद वन विभाग हरकत में तो आया, लेकिन अब तक प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करने वाले पर्यटकों हार्दिक राठोड़ और ऋतुराज जयस्वाल पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। यही नहीं, बाघ मृत्यु की सूचना राष्ट्रीय व्याघ्र संरक्षण प्राधिकरण को भी देरी से दी गई।
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इससे यह आशंका गहराती जा रही है कि कहीं वन विभाग किसी दबाव में तो काम नहीं कर रहा। यदि समय रहते निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो यह मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा, ऐसी आशंका जताई जा रही है। अब देखना होगा कि जांच समिति सच सामने लाती है या फिर मामला हाथ से निकल जाता है।
इस पूरे मामले में हुई ढिलाई से वन विभाग की मंशा पर उंगली उठ रही है। भंडारा जिले के मानद वन्यजीव रक्षक शाहिद खान, पंकज देशमुख, नागपुर के रोहित कारु, उधमसिंघ यादव, अविनाश लोंढे, अजिंक्य भटकर तथा गोंदिया के सावन बाहेकर और मुकुंद धुर्वे ने मुख्य वन संरक्षक नागपुर श्रीलक्ष्मी से दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
साथ ही भंडारा के तीनों मानद वन्यजीव रक्षकों ने भंडारा वन विभाग के उपवन संरक्षक योगेंद्र सिंह से मिलकर भी कार्रवाई की गुहार लगाई है। योगेंद्र सिंह ने समिति इसमें गहन जांच करेगी और किसी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा ऐसा विश्वास दिलाया।