मुंबई में वन भूमि विवाद और म्हाडा पुनर्विकास पर सरकार सक्रिय, इमारतों के पुनर्विकास पर मंत्रालय में बैठक
MHADA Redevelopment: मुंबई में मंत्रालय में आयोजित बैठक में वन भूमि पर बसे आदिवासियों के पुनर्वास और म्हाडा की 388 इमारतों के पुनर्विकास पर चर्चा हुई।
- Written By: आंचल लोखंडे
Forest land rehabilitation Mumbai (सोर्सः सोशल मीडिया)
Forest Land Rehabilitation Mumbai: प्रवीण दरेकर की पहल पर गृहनिर्माण राज्यमंत्री पंकज भोयर के मंत्रालय कक्ष में मंगलवार को वन भूमि पर बसे निवासियों के पुनर्वास और म्हाडा की 388 इमारतों के पुनर्विकास को लेकर महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।
दरेकर ने कहा कि संजय गांधी राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में वर्षों से निवास कर रहे आदिवासी पाड़ों को अतिक्रमण नहीं माना जा सकता, क्योंकि यह समाज वन का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने बताया कि इन बस्तियों में आज तक बिजली, पानी और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं पहुंच पाई हैं। उनकी मांग है कि आदिवासी परिवारों का पुनर्वास उसी क्षेत्र की सरकारी भूमि पर किया जाए।
“निजी वन” के रूप में आरक्षित
केतकीपाड़ा और आसपास के क्षेत्रों में लगभग 80 हजार लोगों की आबादी निवास करती है। बस्तियां बसने के बाद इन जमीनों को “निजी वन” के रूप में आरक्षित कर दिया गया, जिससे पुनर्विकास की प्रक्रिया बाधित हो गई है। न्यायालय के आदेशों के तहत झुग्गियों को हटाया जाता है, जिससे नागरिक बेघर हो जाते हैं। दरेकर ने इन जमीनों को संरक्षित वन क्षेत्र की श्रेणी से बाहर करने की मांग रखी।
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388 म्हाडा इमारतों के पुनर्विकास की चुनौती
बैठक में मुंबई की 388 पुनर्निर्मित म्हाडा इमारतों के पुनर्विकास पर भी विस्तृत चर्चा हुई। दरेकर ने कहा कि डीसीपीआर 2034 की धारा 33(24) लागू होने के बावजूद कम भू-क्षेत्र और अधिक निवासियों की संख्या के कारण परियोजना व्यवहार्य नहीं बन पा रही है। उन्होंने 51 प्रतिशत सहमति की शर्त हटाने, म्हाडा द्वारा सर्वेक्षण कर अलग-अलग योजनाएं तैयार करने तथा सक्षम विकासक की नियुक्ति कर समयबद्ध पुनर्विकास सुनिश्चित करने का सुझाव दिया।
बैठक में कौन-कौन रहे मौजूद
बैठक में नगरसेवक प्रकाश दरेकर, नगरसेविका निशा परुलेकर, गृहनिर्माण विभाग के अपर मुख्य सचिव, म्हाडा के उपाध्यक्ष एवं मुख्याधिकारी, म्हाडा संघर्ष कृति समिति की सचिव वनिता राणे, कार्याध्यक्ष एकनाथ राजपुरे सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
