हिडमा के करीबी ₹50 लाख के इनामी बारसे देवा ने 15 साथियों संग किया सरेंडर, बैकफुट पर माओवादी

Top Naxalite leader Barse Deva surrender: छत्तीसगढ़ में नक्सली आंदोलन की रीढ़ माने जाने वाले ₹50 लाख के इनामी बारसे देवा उर्फ सुक्का ने 15 साथियों के साथ तेलंगाना पुलिस के सामने घुटने टेक दिए हैं।
Top Naxalite leader Barse Deva surrender
बारसे देवा सुकमा (सौजन्य-सोशल मीडिया)
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Chhattisgarh Naxal movement setback: नक्सलवाद के खिलाफ जारी जंग में सुरक्षा बलों को साल 2026 की शुरुआत में ही एक ऐतिहासिक सफलता हाथ लगी है। छत्तीसगढ़ में माओवादी आंदोलन की रीढ़ कहे जाने वाले और दरभा डिवीजनल कमेटी के सचिव बारसे देवा उर्फ सुक्का ने अपने 15 साथियों के साथ तेलंगाना पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। बारसे देवा पर सरकार ने ₹50 लाख का भारी-भरकम इनाम घोषित कर रखा था।

हिडमा के खात्मे के बाद दहशत में था गिरोह

बारसे देवा, कुख्यात नक्सली माडवी हिडमा का सबसे भरोसेमंद साथी माना जाता था। सूत्रों के अनुसार, आंध्र प्रदेश पुलिस द्वारा हिडमा के एनकाउंटर के बाद से ही नक्सली संगठन के भीतर खौफ का माहौल था।

सुरक्षा बलों की बढ़ती घेराबंदी और 'ऑपरेशन प्रहार' जैसे अभियानों के दबाव में बारसे देवा ने आखिरकार हिंसा का रास्ता छोड़ने का फैसला किया। बताया जा रहा है कि उसने सरेंडर के लिए चार राज्यों की पुलिस से संपर्क किया था, जिसके बाद कोठगुडेम जिले में उसने हथियार डाल दिए।

सीआरपीएफ पर घातक हमलों का मास्टरमाइंड

छत्तीसगढ़ के पुर्वर्थी गांव का निवासी बारसे देवा नक्सली कैडर में अपनी साहसिक और क्रूर कार्रवाइयों के लिए जाना जाता था। छत्तीसगढ़ में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के जवानों पर हुए कई बड़े हमलों और घात लगाकर किए गए कत्लेआम में उसकी प्रत्यक्ष भूमिका रही है। हिडमा के सेंट्रल कमेटी में जाने के बाद छत्तीसगढ़ में नक्सली गतिविधियों का पूरा दारोमदार बारसे देवा के कंधों पर ही था।

बैकफुट पर नक्सली संगठन

पुलिस महानिदेशक (तेलंगाना) ने बताया कि बारसे देवा का आत्मसमर्पण नक्सली आंदोलन के लिए एक अपूरणीय क्षति है। यह न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे दंडकारण्य क्षेत्र में माओवादियों को कमजोर करेगा। सुरक्षा बलों की कड़ाई और सरकार की पुनर्वास नीति के चलते अब नक्सली कैडर में बड़े पैमाने पर असंतोष और बिखराव देखा जा रहा है।

पुनर्वास नीति का मिलेगा लाभ

आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सलियों को सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत लाभ दिया जाएगा। पुलिस ने अन्य माओवादियों से भी अपील की है कि वे हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में शामिल हों। इस बड़ी कामयाबी से छत्तीसगढ़, तेलंगाना और महाराष्ट्र के सीमावर्ती इलाकों में शांति बहाली की उम्मीदें और मजबूत हुई हैं।

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