‘ग्लोबल इकोनॉमिक कोऑपरेशन 2026’ सम्मेलन का उद्घाटन, मुंबई बनेगी वैश्विक पूंजी का प्रवेशद्वार: देवेंद्र फडणवीस
Devendra Fadnavis: ग्लोबल इकोनॉमिक कोऑपरेशन 2026 सम्मेलन में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि मुंबई आने वाले समय में वैश्विक पूंजी का प्रवेशद्वार बनेगी।
- Written By: आंचल लोखंडे
Global Economic Cooperation 2026 (सोर्सः सोशल मीडिया)
Mumbai Global Capital Gateway: देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को कहा कि बहुध्रुवीय विश्व में “विश्वसनीय वैश्वीकरण” के नए दौर में महाराष्ट्र का रणनीतिक महत्व और अधिक स्पष्ट हो रहा है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 14–15 प्रतिशत तथा औद्योगिक उत्पादन में लगभग 20 प्रतिशत का योगदान देता है। साथ ही पश्चिमी बंदरगाहों से होने वाले 60 प्रतिशत से अधिक कंटेनर यातायात का संचालन महाराष्ट्र से होता है। आने वाले समय में मुंबई वैश्विक पूंजी का प्रवेशद्वार बनेगी।
विदेश मंत्रालय, फ्यूचर इकोनॉमिक कोऑपरेशन काउंसिल और महाराष्ट्र शासन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन मुख्यमंत्री फडणवीस और एस. जयशंकर की उपस्थिति में हुआ।
आर्थिक संप्रभुता का अर्थ केवल आत्मनिर्भरता नहीं
मुख्यमंत्री ने कहा कि आर्थिक संप्रभुता का अर्थ केवल आत्मनिर्भरता नहीं, बल्कि विविधीकृत व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और तकनीकी क्षमता के संतुलित समन्वय से है। भविष्य की वैश्विक व्यवस्था कॉरिडोर-आधारित होगी और मुंबई पारदर्शिता, नियमन तथा समावेशिता में अग्रणी भूमिका निभाएगी।
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उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र एआई पार्क, डेटा सेंटर क्लस्टर और कौशल विश्वविद्यालय स्थापित कर रहा है। इसके साथ ही ग्रीन हाइड्रोजन, सौर और पवन ऊर्जा तथा सतत अवसंरचना में बड़े पैमाने पर निवेश किया जा रहा है।
बदलती वैश्विक व्यवस्था में भारत की संरचनात्मक प्रगति
मुख्यमंत्री ने कहा कि सेमीकंडक्टर, ऊर्जा, खाद्य सुरक्षा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे क्षेत्र अब राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति का हिस्सा बन चुके हैं। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जी-20 अध्यक्षता, आईएमईसी कॉरिडोर और डिजिटल अवसंरचना के विस्तार ने भारत को वैश्विक मंच पर सशक्त स्थान दिलाया है।
दुनिया के लिए आशा की किरण भारत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संदेश में कहा कि अनिश्चितता के इस दौर में स्थिर नेतृत्व की तलाश कर रही दुनिया के लिए भारत आशा की किरण बनकर उभरा है। उच्च आर्थिक वृद्धि दर और नियंत्रित महंगाई के साथ भारत वैश्विक चुनौतियों के व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत कर रहा है। देश की कुल स्थापित ऊर्जा क्षमता में 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सा गैर-जीवाश्म स्रोतों से आता है। भारत अब ग्लोबल साउथ की एक विश्वसनीय और आत्मविश्वासी आवाज बन चुका है।
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‘डी-रिस्किंग’ और विविधीकरण आवश्यक-एस. जयशंकर
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि अस्थिर वैश्विक माहौल में ‘डी-रिस्किंग’ और विविधीकरण अनिवार्य है। पिछले दशक में अवसंरचना में बड़े निवेश से ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। 5जी, चंद्रयान, वंदे भारत और यूपीआई जैसे नवाचारों ने ‘न्यू इंडिया’ की नई पहचान स्थापित की है। युवा और कुशल मानव संसाधन भारत की सबसे बड़ी ताकत है और भारत एक विश्वसनीय वैश्विक साझेदार के रूप में उभर रहा है।
