
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Maharashtra Disease Control: भंडारा महाराष्ट्र सरकार की ओर से वर्ष 2027 तक राज्य को कुष्ठ रोग के संचरण से मुक्त करने के उद्देश्य से कुसुम (कुष्ठमुक्त सुरक्षित महाराष्ट्र) अभियान चलाया जा रहा है। यह एक विशेष राज्यव्यापी अभियान है, जिसकी शुरुआत 30 जनवरी, महात्मा गांधी की पुण्यतिथि से हुई है और यह 13 फरवरी तक पखवाड़े के रूप में संचालित किया जा रहा है।
अभियान का मुख्य उद्देश्य कुष्ठ रोग के मामलों की सक्रिय खोज, समय पर उपचार और समाज में फैले डर व कलंक को कम करना है। भंडारा जिले में इस अभियान के तहत 206 उच्च जोखिम वाली आबादी को कवर करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। प्रत्यक्ष रूप से जिले में 218 हाई रिस्क साइट्स पर यह अभियान चलाया जा रहा है।
इनमें 15 आश्रम शालाएं, 11 छात्रावास, 184 ईंट-भट्टे, 2 खदानें तथा जिला कारागृह शामिल हैं। इन सभी स्थानों पर स्वास्थ्य विभाग की टीमें जाकर लोगों की जांच कर रही हैं। अभियान के दायरे में जिले के कुल 11,160 लोगों को शामिल किया गया है। इस व्यापक अभियान के सफल क्रियान्वयन के लिए तहसील स्तर पर कुल 7 टीमें गठित की गई हैं।
प्रत्येक टीम में 2 कर्मचारियों की नियुक्ति की गई है, जो सर्वेक्षण, जांच और जनजागरूकता का कार्य कर रही हैं। इन कर्मचारियों को मानदेय के रूप में भुगतान किया जाएगा, जिसके लिए कुल 11,700 रुपये की राशि उपलब्ध कराई गई है।
कुष्ठरोग विभाग के आंकड़ों के अनुसार भंडारा जिले में वर्तमान में कुष्ठ रोग की दर 3.5 है। जनवरी के अंत तक जिले में कुल 481 कुष्ठ रोगी उपचार के अंतर्गत है। इसके अलावा 1 अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 की अवधि के दौरान 461 नए कुष्ठ रोगियों की पहचान की गई है।
यह आंकड़ा यह दर्शाता है कि सक्रिय खोज अभियान कितना आवश्यक है, नए कुष्ठ रोगी के संपर्क में आने वाले पीईयी (प्रोफिलेक्टिक उपचार) का सिंगल डोज दिया जाता है। इस गणना के अनुसार 461 रोगियों के संपर्क में आए 12.771 लोगों को पीईपी की खुराक प्रदान की जा चुकी है, जिससे भविष्य में संक्रमण के फैलाव को रोका जा सके,
कुसुम अभियान के साथ-साथ जिले में स्पर्श जनजागरूकता अभियान भी 30 जनवरी से 13 फरवरी तक चलाया जा रहा है। अभियान के तहत 30 जनवरी को जिले की सभी 541 ग्राम पंचायतों में ग्राम सभाओं का आयोजन किया गया।
सभाओं में कलेक्टर का आह्वान पत्र पढ़कर सुनाया गया और ग्रामीणों को कुष्ट रोस से मुक्ति की शपथ दिलाई गई। इसके पश्चात प्रभात फेरियों, नाटकों, एकांकिकाओं और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को कुष्ठ रोग के लक्षण, उपचार और रोकथाम के बारे में जागरूक किया जा रहा है।
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प्रशासन का मानना है कि समय पर पहचान, सही उपचार और समाज की सहभागिता से ही कुष्ठ रोग के प्रति फैले भय और भेदभाव को समाप्त किया जा सकता है। कुसुम और स्पर्श अभियानों के माध्यम से भंडारा जिला कुष्ठमुक्ति की दिशा मैं एक मजबूत कदम बढ़ा रहा है।






