फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र से नौकरी! भंडारा में बड़ा घोटाला उजागर; राजस्व विभाग में सनसनी

Bhandara Fake Disability: भंडारा में फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्रों से सरकारी नौकरी और पदोन्नति लेने का खुलासा। पुनः जांच में 22 में से 7 कर्मचारी अपात्र पाए गए।
Jobs obtained with fake disability certificates! Major scam exposed in Bhandara; sensation in the revenue department.
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
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Bhandara Fake Certificate Scam: भंडारा दिव्यांगों के संवैधानिक अधिकारों पर खुला डाका डालते हुए कुछ कर्मचारियों ने फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्रों के सहारे न केवल शासकीय नौकरियां हासिल कीं बल्कि वर्षों तक पदोन्नति का लाभ भी उठाया। जिले के राजस्व विभाग में सामने आए इस गंभीर मामले ने प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है।

नागपुर मेडिकल बोर्ड की पुनः जांच में 22 में से 7 कर्मचारी शासन के दिव्यांग मानदंडों पर खरे नहीं उतरे हैं। यह पूरा मामला सामाजिक कार्यकर्ता विजय क्षीरसागर के सतत संघर्ष का परिणाम है।

क्षीरसागर पिछले ढाई वर्षों से बधिरता, दृष्टिहीनता तथा अन्य दिव्यांगता के नाम पर फर्जी प्रमाणपत्र प्रस्तुत कर शासकीय सेवा में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों की जांच की मांग कर रहे थे। उनकी शिकायत के आधार पर भंडारा जिले में शासकीय नौकरी प्राप्त कर चुके करीब 322 तथाकथित दिव्यांग कर्मचारियों के प्रमाणपत्रों की जांच प्रक्रिया शुरू की गई।

जांच में यह स्पष्ट होने लगा कि कई कर्मचारियों ने दिव्यांगता को बढ़ा-चढ़ाकर दर्शाया या फिर दिव्यांग न होते हुए भी फर्जी प्रमाणपत्रों के जरिए नौकरी प्राप्त की। राजस्व विभाग में कार्यरत 22 कर्मचारियों की पुनः जांच में 7 कर्मचारी ऐसे पाए गए जिनकी दिव्यांगता 40 प्रतिशत से कम थी, जो शासन के मानकों के अनुसार अपात्र मानी जाती है।

मंत्री बावनकुले ने दिए जांच के निर्देश

पिछले वर्ष 1 अगस्त को भंडारा के समीक्षा बैठक में राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले के समक्ष विजय क्षीरसागर ने दस्तावेजों सहित शिकायत प्रस्तुत की। मंत्री बावनकुले ने नागपुर मेडिकल बोर्ड से जांच कर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। कलेक्टर ने सभी 25 संदिग्ध कर्मचारियों को जांच के लिए नागपुर भेजा। 20 और 21 नवंबर को 22 कर्मचारियों की मेडिकल बोर्ड द्वारा जांच की गई। बोर्ड ने प्रवर्गवार परीक्षण कर 30 जनवरी 2026 को विस्तृत रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपी। रिपोर्ट में 7 कर्मचारियों को दिव्यांग मानकों से बाहर बताया गया है, जबकि 3 कर्मचारियों को आगे की जांच के लिए भेजने की सिफारिश की गई है।

बाकी विभागों में भी हों जांच : क्षीरसागर

क्षीरसागर ने आरोप लगाया कि जिले में 25 संदिग्ध फर्जी दिव्यांग कर्मचारी 10 से 15 वर्षों से शासकीय सेवा और पदोन्नति का लाभलेते रहे। बीते दो वर्षों में इन कर्मचारियों ने वरिष्ठ अधिकारियों के अनेक पत्रों की अनदेखी करते हुए लुका-छिपी का खेल खेला, जिला प्रशासन ने जानबूझकर कुछ कर्मचारियों को बचाने के लिए नागपुर मेडिकल बोर्ड के बजाय जिला अस्पताल से औपचारिक और सत्तही जांच करवाई।

इस दौरान सेंटिंग और लीपापोती का खेल चलता रहा, तत्कालीन निवासी उपजिलाधिकारी पर भी समयकाटू रवैया अपनाने का आरोप लगाया गया। इसी तरह की जांच राजस्व के अलावा जिए, कीड़ा, आरोग्य और शिक्षा विभाग में भी इसके प्रयास शुरू है।

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