गोसीखुर्द परियोजना प्रभावितों का सब्र टूटा, मांगें नहीं मानी गईं तो गणतंत्र दिवस पर आत्मदहन की चेतावनी
Project Affected Protest: गोसीखुर्द परियोजना से जुड़े लंबित मुद्दों पर कार्रवाई न होने से नाराज़ प्रभावितों ने चेतावनी दी है कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो 26 जनवरी को आत्मदहन किया जाएगा।
- Written By: आंचल लोखंडे
Project Affected Protest (सोर्सः सोशल मीडिया)
Gosikhurd Project: गोसीखुर्द परियोजना से जुड़े वर्षों से लंबित मुद्दों को लेकर एक बार फिर माहौल गरमा गया है। प्रशासन की ओर से बार-बार दिए गए आश्वासनों पर अमल न होने से नाराज़ परियोजना प्रभावितों ने आंदोलन को और तीव्र करने का निर्णय लिया है। गोसीखुर्द परियोजना प्रभावित संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) को आवेदक भाऊ कातोरे आत्मदहन करेंगे।
आश्वासन भूले, गुस्से में प्रभावित
दिसंबर 2025 में परियोजना प्रभावितों ने कारधा में वैनगंगा नदी के तट पर जलसमाधि आंदोलन शुरू किया था। आंदोलन के दौरान 13 दिसंबर की रात पालकमंत्री ने फोन पर आंदोलनकारियों से बातचीत कर विधानमंडल सत्र के बाद अगले सप्ताह निर्णायक बैठक आयोजित करने का आश्वासन दिया था। इसी भरोसे पर आंदोलन स्थगित किया गया, लेकिन एक माह बीत जाने के बावजूद अब तक बैठक की कोई तिथि तय नहीं हुई।
उपजिलाधिकारी का पत्र, मुख्यमंत्री स्तर की बैठक की जरूरत
मामले की गंभीरता को देखते हुए उपजिलाधिकारी (पुनर्वसन) डॉ. पूजा पाटील ने पालकमंत्री के विशेष कार्य अधिकारी को पत्र भेजा है। पत्र में उल्लेख किया गया है कि परियोजना प्रभावितों की कई मांगें राज्य सरकार के नीतिगत निर्णयों से जुड़ी हैं, जिन पर मुख्यमंत्री स्तर पर बैठक आवश्यक है। आत्मदहन की चेतावनी को ध्यान में रखते हुए कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने से पहले पालकमंत्री द्वारा शीघ्र बैठक आयोजित करने का अनुरोध किया गया है।
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प्रमुख मांगें क्या हैं?
गोसीखुर्द परियोजना प्रभावितों के पुनर्वसन से जुड़े मुद्दे दशकों से लंबित हैं। इनमें बढ़ा हुआ मुआवजा, गांवठाणों में मूलभूत नागरिक सुविधाएं, नौकरी के बदले सानुग्रह अनुदान और अन्य बकाया लाभ शामिल हैं। बार-बार ज्ञापन देने के बावजूद ठोस निर्णय न होने से प्रभावितों में असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है।
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प्रशासन की भागदौड़
जिलाधिकारी कार्यालय पहले ही परियोजना प्रभावितों की मांगों का विस्तृत प्रतिवेदन शासन को भेज चुका है। हालांकि, मुख्यमंत्री या पालकमंत्री स्तर पर निर्णय के बिना आंदोलनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। 26 जनवरी की चेतावनी के बाद अब पूरे जिले की नजर पालकमंत्री डॉ. पंकज भोयर की भूमिका पर टिकी हुई है।
प्रतिक्रिया
गोसीखुर्द परियोजना प्रभावित संघर्ष समिति के संयोजक भाऊ कातोरे ने कहा कि “हमें केवल बैठक का आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस और लिखित निर्णय चाहिए। यदि 25 जनवरी तक मुख्यमंत्री की मौजूदगी में सकारात्मक चर्चा या निर्णय नहीं हुआ, तो 26 जनवरी को समिति के पांच सदस्य सामूहिक आत्मदहन करेंगे। इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।”
