कॉन्सेप्ट फोटो (सोर्स: सोशल मीडिया)
Akola Kisanrao Hundiwal Murder Case: महाराष्ट्र के बहुचर्चित ‘किसानराव हुंडीवाले’ हत्याकांड में बुधवार को जिला एवं सत्र न्यायालय ने अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया। मई 2019 में गावली समाज के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष की बर्बर हत्या के मामले में कोर्ट ने 10 लोगों को दोषी करार देते हुए उन्हें उम्रकैद की सजा दी है।
यह सनसनीखेज वारदात 6 मई 2019 को अकोला शहर के चैरिटी कमिश्नर कार्यालय के भीतर हुई थी। गावली समुदाय के कद्दावर नेता किसानराव हुंडीवाले वहां एक आधिकारिक काम से पहुंचे थे। इसी दौरान उन पर जानलेवा हमला किया गया। हमला इतना भीषण था कि हुंडीवाले के सिर पर अग्निशमन यंत्र (Fire Extinguisher) के सिलेंडर से प्रहार किया गया, जिससे उनकी मौत हो गई थी। इस घटना से पूरे राज्य में आक्रोश फैल गया था।
पुलिस जांच और अभियोजन पक्ष की दलीलों के अनुसार, इस खूनी संघर्ष की जड़ में एक शैक्षणिक संस्थान के प्रबंधन और नियंत्रण का विवाद था। हुंडीवाले और आरोपी पक्ष के बीच लंबे समय से खींचतान चल रही थी। घटना के दिन कार्यालय के भीतर ही दोनों पक्षों में तीखी बहस हुई, जिसने हिंसक रूप ले लिया और हुंडीवाले की हत्या कर दी गई।
इस मामले में सरकार की ओर से प्रख्यात अधिवक्ता उज्ज्वल निकम ने पैरवी की। फैसले के बाद पत्रकारों से बात करते हुए निकम ने बताया कि पर्याप्त साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत ने 10 लोगों को सजा सुनाई है। हालांकि, कोर्ट ने साक्ष्यों के अभाव में 5 अन्य आरोपियों प्रवीण श्रीराम गावंडे, मंगेश गावंडे, दीपाली गावंडे, नम्रता गावंडे और शेख साबिर को बरी कर दिया है।
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अदालत ने जिन 10 लोगों को दोषी ठहराया है उनमें श्रीराम गवांडे, रंजीत गवांडे, विक्रम गवांडे, सूरज गवांडे, धीरज गवांडे, विशाल तायडे, सतीश तायडे, प्रतीक टोंडे, मयूर अहीर और दिनेश राजपूत शामिल हैं। सिविल लाइंस पुलिस स्टेशन में इस मामले में कुल 15 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
गावली समाज और हुंडीवाले के समर्थकों के लिए यह फैसला राहत लेकर आया है। 5 साल तक चली इस कानूनी लड़ाई में आखिरकार कोर्ट ने माना कि यह एक सोची-समझी साजिश थी। इस फैसले ने यह संदेश भी दिया है कि सरकारी कार्यालयों के भीतर कानून-व्यवस्था को हाथ में लेने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।