तेंदुआ (सोर्स: सोशल मीडिया)
Pune Leopard News: पुणे जिले की शिरूर, जुन्नर और आंबेगांव तहसीलों में पिछले कई दिनों से बना तेंदुए का आतंक अब कम होने लगा है। वन विभाग ने अलग-अलग अभियानों के तहत कोरेगाव भीमा, शिंगवे व काकडपट्टा क्षेत्र में तीन मादा तेंदुए को पकड़ने में सफलता हासिल की है, वहीं गन्ने के खेत में मिले शावकों को उनकी मां से मिलाने के प्रयास भी जारी हैं। शिरूर तहसील के कोरेगांव भीमा इलाके के नरेश्वर मंदिर, कल्याणी फाटा और वढू रोड पर तेंदुए की आवाजाही से ग्रामीण डरे हुए थे।
पशुओं पर बढ़ते हमलों को देखते हुए सरपंच संदीप ढेरंगे के खेत में पिंजरा लगाया गया था। रविवार तड़के लगभग दो वर्ष की एक मादा तेंदुआ उसमें कैद हो गई। शिरूर वन परिक्षेत्र अधिकारी नीलकंठ गव्हाणे और वन्यजीव बचाव दल ने तेंदुए को सुरक्षित कब्जे में लेकर माणिकडोह तेंदुआ निवारण केंद्र (जुन्नर) भेज दिया है। इस दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।
आंबेगाव तहसील के शिंगवे गाव में पिछले 20 दिनों से जारी तेंदुए का आतंक भी थम गया है। वन विभाग ने कड़ी मशक्कत के बाद यहां से एक मादा तेंदुए को पकड़ा है, जिसे जुन्नर के माणिकडोह केंद्र भेज दिया गया है। लेकिन वन विभाग ने चेतावनी दी है कि इलाके में अब भी शावक मौजूद हो सकते है, इसलिए नागरिक रात में अकेले बाहर न निकले, सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें।
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शिरूर के ही टाकली भीमा में गन्ना कटाई के दौरान तेंदुए के दो छोटे शावक मिलने से हड़कंप मच गया। वन विभाग और रेस्क्यू टीम ने तुरंत मौके पर पहुंचकर उनकी स्वास्थ्य जांच की। प्रकृति के संरक्षण के नियम अनुसार, इन शावकों को उनकी मां से पुनर्मिलन कराने के लिए वापस उसी खेत में सुरक्षित स्थान पर रखा गया है, ताकि मादा तेंदुआ उन्हें अपने साथ ले जा सके। जुन्नर तहसील अंतर्गत पिंपलवंडी के काकडपट्टा क्षेत्र में सोमवार तड़के वन विभाग को बड़ी सफलता मिली, जहां किसान मयूर नेताजी वाघ के घर के पास लगाए गए जिसमें तेंदुआ बंद हो गया।