भंडारा में मनरेगा पर हड़ताल का असर: 541 ग्राम रोजगार सेवक काम से दूर, ग्रामीण मजदूरों पर संकट
MGNREGA Work Stopped Bhandara: भंडारा जिले में 541 ग्राम रोजगार सेवकों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के कारण मनरेगा के काम पूरी तरह ठप हो गए हैं, जिससे रोजगार और आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।
- Written By: आंचल लोखंडे
Bhandara MGNREGA Strike (सोर्सः सोशल मीडिया)
Gram Rojgar Sevak Protest Maharashtra: भंडारा जिले में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (रोगायो) इन दिनों पूरी तरह से वेंटिलेटर पर नजर आ रही है। जिले के 541 ग्राम रोजगार सेवकों ने अपनी 18 महीनों से लंबित मांगों को लेकर 1 अप्रैल से राज्यव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। इस आंदोलन के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में चलने वाले रोजगार के सभी काम पूरी तरह ठप्प हो गए हैं, जिससे तपती धूप में मजदूरी की तलाश कर रहे ग्रामीणों के सामने आजीविका का गंभीर संकट पैदा हो गया है।
हालात इतने खराब हो चुके हैं कि अब गांवों से मजदूरों का पलायन शहरों की ओर तेजी से बढ़ने लगा है। ग्राम रोजगार सेवक संगठन की ओर से पुकारी गई इस हड़ताल के पीछे मुख्य कारण राज्य सरकार का वह शासनादेश है जो 3 अक्टूबर 2024 को जारी किया गया था। इस आदेश के तहत सेवकों को 8 हजार रुपये प्रति माह मानधन देने की बात कही गई थी।
पसरा हुआ है सन्नाटा
इसके अलावा रोजगार सेवक 2 हजार रुपये यात्रा भत्ता और 2 प्रतिशत अतिरिक्त भत्ता मंजूर करने की मांग कर रहे हैं। सेवकों का स्पष्ट कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होती, वे काम पर वापस नहीं लौटेंगे। दूसरी ओर, ग्रीष्मकाल सेवकों का स्पष्ट कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होती, वे काम पर वापस नहीं लौटेंगे। दूसरी ओर, ग्रीष्मकाल के दौरान जहां गांवों में मजदूरी आधारिक बड़े पैमाने पर कार्य शुरू होने चाहिए थे वहां सन्नाटा पसरा हुआ है।
सम्बंधित ख़बरें
भंडारा में बेला-सिरसी बायपास निर्माण की मांग तेज, शिवसेना ने मंत्री को भेजा ज्ञापन
भंडारा में अधूरी सड़कें बनी मुसीबत, गड्ढों से बढ़ा हादसों का खतरा
भंडारा में औषधि सुरक्षा अभियान तेज, संदिग्ध दवाओं पर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई
भंडारा में मानसून की दस्तक, बारिश से गर्मी से राहत लेकिन किसानों की चिंता बरकरार
ये भी पढ़े: तेंदुए के हमले से 11 बकरियों की मौत, परसोडी में तेंग्रामीणों ने वन विभाग से कार्रवाई की मांग
ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सामने खड़ा हुआ बड़ा संकट
इस हड़ताल का सीधा असर जिले की ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। जिले में कोई बड़ा उद्योग नहीं होने के कारण यहां की एक बड़ी आबादी खेती और रोगायो की मजदूरी पर ही आश्रित है। आमतौर पर मजदूर गर्मियों में रोहयो के माध्यम से जो बचत करते हैं, उसी से मानसून के दौरान खरीफ की फसलों के लिए बीज, खाद और कीटनाशकों का इंतजाम किया जाता है। साथ ही जून में शुरू होने वाले नए शैक्षिक सत्र में बच्चों की स्कूल फीस और कॉपियों का खर्च भी इसी आय से निकलता है। अब काम बंद होने से किसानों और खेतिहर मजदूरों का पूरा आर्थिक चक्र बिगड़ गया है।
बेरोजगारों को 125 दिनों का रोजगार मिलने की गारंटी केवल कागजों पर
हैरानी की बात यह है कि केंद्र सरकार ने हाल ही में योजना का नाम बदलकर विकसित भारत रोजगार व आजीविका गारंटी मिशन कर दिया है और इसके तहत प्रति परिवार 125 दिनों के रोजगार की गारंटी दी गई है। लेकिन धरातल पर रोजगार सेवकों की अनुपस्थिति में यह गारंटी केवल कागजों तक सीमित रह गई है।
ग्रामीण क्षेत्रों में काम न मिलने से मजदूर ग्राम पंचायत जाकर नाराजगी का इजहार कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन के पास फिलहाल इसका कोई ठोस जवाब नहीं है। ग्राम पंचायतें भी संसाधनों और मानव बल के अभाव में शासन की ओर उंगली उठा रही हैं। यदि यह गतिरोध जल्द समाप्त नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में जिले में बेरोजगारी और भुखमरी जैसी विकराल स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
