Ahilyanagar Women Self Help Groups (सोर्सः सोशल मीडिया)
Ahilyanagar Women Self Help Groups: सिर्फ बचत तक सीमित नहीं, अहिल्यानगर जिले में सेविंग्स ग्रुप्स का मुवमेंट अब सामाजिक और आर्थिक बदलाव का असरदार माध्यम बन गया है। वर्तमान में जिले में 30,112 महिला बचत समूह सक्रिय हैं, जिनसे 3 लाख 15 हजार से अधिक महिलाएं जुड़ी हुई हैं। इन समूहों को बैंकों से जोड़कर 168.20 करोड़ रुपये का ऋण वितरण करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन इसके मुकाबले 353.09 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड लोन वितरित किया जा चुका है। इस मजबूत आर्थिक सहयोग के कारण महिलाओं में आत्मनिर्भरता की नई भावना जागी है और उन्होंने ‘लोकल से ग्लोबल’ की अवधारणा को साकार किया है।
महाराष्ट्र स्टेट रूरल लाइवलीहुड इम्प्रूवमेंट मिशन (UMED), जिला ग्रामीण विकास यंत्रणा तथा महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त प्रयासों से अहिल्यानगर जिले में महिला स्वयं सहायता समूहों ने सशक्तिकरण की दिशा में बड़ी छलांग लगाई है। जिले ने केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘लखपति दीदी’ पहल में भी अग्रणी स्थान हासिल किया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 1,80,444 महिलाओं को लखपति बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिसमें से अब तक 1,37,234 महिलाएं यह उपलब्धि हासिल कर चुकी हैं।
महिला किसान उत्पादक कंपनियों और ग्राम संगठनों के माध्यम से सामूहिक खरीद-बिक्री तथा कृषि सेवा केंद्र स्थापित कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दी जा रही है। बेहतर गुणवत्ता, स्थानीय स्वाद और आकर्षक पैकेजिंग के कारण महिलाओं द्वारा तैयार उत्पादों को व्यापक बाजार मिल रहा है। इसके लिए जिला स्तर पर प्रदर्शनियां और मेले आयोजित किए जा रहे हैं, साथ ही डिजिटल तकनीक का भी प्रभावी उपयोग किया जा रहा है।
सरकारी प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता के बल पर महिलाओं ने औद्योगिक उत्पादन के क्षेत्र में भी कदम बढ़ाया है। मसाले, पापड़, अचार, बेकरी उत्पाद, हस्तशिल्प, मोमबत्तियां और रेडीमेड वस्त्रों के साथ-साथ महिलाएं डेयरी, पोल्ट्री, बकरी पालन और सब्जी उत्पादन जैसे कृषि आधारित व्यवसायों में भी सक्रिय हो रही हैं।
‘तैयार उम्मीद अभियान’ के तहत विकसित ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म ‘उम्मीद मार्ट’ पर जिले के करीब 180 उत्पाद ऑनलाइन बिक्री के लिए उपलब्ध कराए गए हैं। सोशल मीडिया के माध्यम से ये उत्पाद राज्य के बाहर और देशभर के ग्राहकों तक पहुंच रहे हैं, जिससे बिक्री में उल्लेखनीय वृद्धि हो रही है।
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आर्थिक प्रगति के कारण जो महिलाएं पहले परिवार में निर्णय प्रक्रिया से दूर रहती थीं, वे अब नेतृत्वकारी भूमिका निभा रही हैं। आय में वृद्धि से बच्चों की शिक्षा को बढ़ावा मिला है और परिवार के स्वास्थ्य तथा जीवन स्तर में भी सुधार हुआ है। महिला स्वयं सहायता समूहों का यह मॉडल ‘आत्मनिर्भर बनें और समाज को मजबूत बनाएं’ का संदेश देते हुए जिले के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
इस पहल से जिले में कई सफल महिला उद्यमी सामने आई हैं। इनमें अहिल्यानगर तालुका की मीरा बेरड (स्वामी समर्थ ग्रुप), संगमनेर की शोभना सोनवणे (माई ग्रुप) और ज्योति संस्कार (मी उद्योगिका), पारनेर की शिल्पा बेलोटे (राधिका ग्रुप), श्रीगोंदा की शीतल गवटे, नगर की विनया मुले (श्रीकृष्ण ग्रुप) और अश्विनी कोलपकर, श्रीरामपुर की ज्योति जगताप और साक्षी अघाड़े (साई समृद्धि) तथा अकोले की शीला इडे (संधान ग्रुप) शामिल हैं। इन महिलाओं ने अपने उत्पादों को ब्रांड के रूप में विकसित कर स्वतंत्र पहचान बनाई है।