अकोला में बढ़ती गर्मी से घटा जलस्तर, काटेपूर्णा बांध में 34% ही पानी शेष
Akola Water Crisis: अकोला जिले में बढ़ती गर्मी के कारण जल प्रकल्पों का जलस्तर तेजी से घट रहा है, जहां काटेपूर्णा बांध में 34।44% और वान बांध में 52।99% जलभंडारण दर्ज किया गया है।
- Written By: आंचल लोखंडे
Katepurna Dam Water Level (सोर्सः सोशल मीडिया)
Katepurna Dam Water Level: अकोला शहर तथा जिले में दिन प्रतिदिन तापमान में बढ़ोतरी हो रही है, जिससे जल प्रकल्पों का जलस्तर लगातार कम होता जा रहा है। 12 अप्रैल को काटेपूर्णा बांध में 34.44 प्रश और वान बांध में 52.99 प्रश जलसंचय दर्ज किया गया है। जिले में लगातार बढ़ते तापमान ने नागरिकों की चिंता बढ़ा दी है। हाल ही में वातावरण में बदलाव के कारण तापमान कुछ कम हुआ था, लेकिन अब बादल छंटने के बाद सूर्य की तीव्र किरणों से पारा फिर चढ़ गया है। वर्तमान में तापमान 42 डिसे से ऊपर दर्ज किया गया है।
इसका सीधा असर जल स्रोतों पर पड़ रहा है और जल प्रकल्पों में जलभंडारण तेजी से घट रहा है। अकोला शहर, एमआईडीसी और मुर्तिजापुर शहर को पानी की आपूर्ति करने वाला बार्शीटाकली तहसील में स्थित काटेपूर्णा बांध में अब केवल 34.44 प्रतिशत जलभंडारण रह गया। है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में तापमान इसी तरह बढ़ता रहा तो जिले में पानी की गंभीर समस्या उत्पन्न हो सकती है।
जिले में 2 बड़े, 3 मध्यम प्रकल्प
जिले में कुल 29 जल प्रकल्प हैं, जिनमें काटेपूर्णा और वान दो बड़े बड़े प्रकल्प हैं। काटेपूर्णा बांध से अकोला शहर में जलापूर्ति की जाती है। जबकि तीन मध्यम और 24 लघु प्रकल्प शामिल हैं। इनसे नागरिकों को पेयजल और किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जाता है।
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लेकिन बढ़ती गर्मी के कारण सभी प्रकल्पों का जलस्तर लगातार कम हो रहा है। काटेपूर्णा बांध, जो जिले का सबसे बड़ा प्रकल्प माना जाता है, उसमें जलभंडारण तेजी से घट रहा है। यदि स्थिति यही रही और समय पर बारिश नहीं हुई तो अकोला और मुर्तिजापुर के नागरिकों को पानी संकट का सामना करना पड़ सकता है।
4 बांधों में संतोषजनक जलभंडारण
हालांकि जिले के अधिकाश प्रकल्पों में जलभंडारण घट रहा है, लेकिन तेल्हारा तहसील का वान बाघ और बार्शीटाकली तहसील का दगडपारवा बांध अभी भी संतोषजनक स्थिति में हैं। इनमें पेयजल और सिंचाई दोनों के लिए पानी आरक्षित किया गया है। उल्लेखनीय है कि बीते वर्ष बारिश के मौसम में सभी जल प्रकल्प ओवरफ्लो हुए थे।
(इनपुटः अरुण कुमार वालोकार)
