
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स : सोशल मीडिया )
Bhandara Ladki Bahin Scheme: भंडारा जिले में मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहन योजना के लाभ से वंचित हजारों महिलाओं का गुस्सा फूट पड़ा है। शुक्रवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण अंचलों से आई महिलाओं ने जिला महिला एवं बाल विकास कार्यालय में डेरा डालकर विरोध प्रदर्शन किया और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
इतना ही नहीं तो यह महिलाएं राष्ट्रीय महामार्ग पर पहुंच गई और राष्ट्रीय महामार्ग पर धरने पर बैठ गई। इस कारण कुछ देर तक यातायात प्रभावित हो गया। राष्ट्रीय महामार्ग से इन महिलाओं को हटाने के लिए प्रशासन को बड़ी परेशानी उठानी पड़ी।
ई-केवाईसी प्रक्रिया में हुई तकनीकी गड़बड़ियों के कारण पात्र महिलाओं का अनुदान अचानक बंद होने से लाभार्थियों में भारी असंतोष देखा जा रहा है। उसी का यह नतीजा इस कदर विरोध प्रदर्शन के रूप में सामने आया।
भंडारा जिले में कुल 2,82,788 महिलाएं इस योजना के लिए पात्र हैं, लेकिन हाल ही में अनिवार्य की गई ई-केवाईसी प्रक्रिया इन महिलाओं के लिए गले की फांस बन गई है। केवाईसी के दौरान पूछे गए जटिल और तकनीकी सवालों के कारण कई महिलाओं ने अनजाने में गलत विकल्प चुन लिए।
उदाहरण के तौर पर, परिवार में कोई सरकारी नौकरी में न होने या पति के आयकरदाता न होने के बावजूद सिस्टम में गलत दर्ज हो गया, जिससे वे योजना से बाहर हो गई। कार्यालय पहुंचे लाभार्थियों का आरोप है कि कर्मचारी केवल स्टेटस चेक करके लाभ बंद होने की जानकारी दे रहे हैं, लेकिन इस त्रुटि को सुधारने का कोई ठोस रास्ता नहीं बता रहे हैं।
महिलाओं ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार ने चुनाव तक लाभ दिया और अब तकनीकी कारणों का बहाना बनाकर उन्हें अधर में छोड़ दिया है।
लाभ बंद होने की शिकायतें बड़े पैमाने पर मिल रही हैं। यह स्थिति केवल भंडारा ही नहीं बल्कि पूरे राज्य में देखी जा रही है। उन्होंने कहा कि शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए 13 जनवरी को आयुक्त के माध्यम से सरकार को पत्र भेजकर वस्तुस्थिति से अवगत करा दिया गया है। शासन से प्राप्त होने वाले अगले दिशा-निर्देशों के अनुसार ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
– अरुण बांदूरकर, महिला एवं बाल विकास अधिकारी
31 दिसंबर की समय सीमा समाप्त होने के बाद पोर्टल से ई-केवाईसी की सुविधा बंद होना भी बड़ी समस्या बन गई है।
पीड़ित महिला लाभार्थी उषा पडोले, दुर्गा दमाहे और मोना आगरे ने बताया कि वे मजदूर और साधारण परिवार से हैं और शुरू में उन्हें नियमित पैसे मिल रहे थे।
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अब घर बैठे ही उन्हें सरकारी नौकरी वाला दिखाकर अपात्र कर दिया गया है, जो सरासर गलत है। महिलाओं ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही तकनीकी खामियां दूर कर अनुदान शुरू नहीं किया गया, तो वे जनप्रतिनिधियों के घर का घेराव करेंगी।






