mass marriage scheme (सोर्सः सोशल मीडिया)
Bhandara News: महाराष्ट्र सरकार की महत्वाकांक्षी कन्यादान योजना भंडारा जिले में पिछले तीन वर्षों से फाइलों में दबी नजर आ रही है। स्थिति यह है कि बीते तीन सालों में जिले के एक भी पात्र जोड़े को इस योजना का लाभ नहीं मिल सका है।
सामाजिक न्याय विभाग की ओर से संचालित यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर और पिछड़े वर्ग के परिवारों को विवाह के समय वित्तीय सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से शुरू की गई थी, लेकिन स्थानीय स्तर पर सामूहिक विवाह आयोजनों के अभाव और कड़ी शर्तों के कारण यह योजना पूरी तरह निष्क्रिय साबित हो रही है।
यह योजना मुख्य रूप से अनुसूचित जाति, विमुक्त जाति, घुमंतू जनजाति और विशेष पिछड़ा वर्ग के परिवारों के लिए बनाई गई है। इसके तहत सामूहिक विवाह समारोह में शादी करने वाले नवदंपतियों को 20,000 से 25,000 रुपये तक की आर्थिक सहायता दी जाती है। इस सहायता का उद्देश्य विवाह के खर्च को कम करना और गरीब परिवारों को कर्ज के बोझ से बचाना है। योजना के प्रावधानों के अनुसार, सामूहिक विवाह आयोजित करने वाली संस्था को भी प्रति जोड़ा 5,000 रुपये का प्रोत्साहन अनुदान दिया जाता है।
योजना के ठप होने के पीछे सबसे बड़ा कारण इसमें निहित 10 जोड़ों की अनिवार्य शर्त को माना जा रहा है। नियम के अनुसार, सामूहिक विवाह समारोह आयोजित करने के लिए कम से कम 10 जोड़ों का एक साथ पंजीकरण होना आवश्यक है। जिले में पिछले तीन वर्षों से यह संख्या पूरी नहीं हो पाई, जिसके कारण न तो सामूहिक विवाह आयोजित हो सके और न ही किसी को अनुदान मिल सका। सामाजिक कार्यकर्ताओं का तर्क है कि इस शर्त के कारण जरूरतमंद परिवार योजना का लाभ लेने से वंचित रह रहे हैं।
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योजना का लाभ लेने के लिए वधू और वर दोनों का महाराष्ट्र का निवासी होना अनिवार्य है। साथ ही वधू की आयु 18 वर्ष और वर की आयु 21 वर्ष से कम नहीं होनी चाहिए। यह लाभ केवल प्रथम विवाह के लिए और सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी जाति प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने पर ही दिया जाता है।
जिले में इस योजना के बंद पड़े रहने से पिछड़े वर्ग के परिवारों में भारी निराशा है। कई संगठनों ने मांग की है कि प्रशासन को इस शर्त में ढील देनी चाहिए या फिर व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान चलाना चाहिए, ताकि अधिक से अधिक जोड़ों को एक मंच पर लाकर योजना का लाभ दिलाया जा सके।