कास्ट्राईब और संविधान परिवार ने जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन; यूजीसी के नए नियमों का समर्थन
UGC Regulation 2026: भंडारा में कास्ट्राईब और संविधान परिवार ने यूजीसी के 2026 विनियम का समर्थन करते हुए जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा।
- Written By: आंचल लोखंडे
Bhandara memorandum news (सोर्सः सोशल मीडिया)
Samvidhan Parivar Bhandara: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा उच्च शिक्षण संस्थानों में जातीय भेदभाव, अपमान और मानसिक प्रताड़ना रोकने के लिए जारी किए गए नए नियमों का महाराष्ट्र राज्य कास्ट्राईब कर्मचारी कल्याण महासंघ और संविधान परिवार, भंडारा ने जोरदार समर्थन किया है। इस संबंध में प्रधानमंत्री और यूजीसी अध्यक्ष के नाम एक ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से सौंपा गया। ज्ञापन में नियमों का स्वागत करते हुए उसमें मौजूद विसंगतियों को दूर करने की मांग की गई है।
यूजीसी ने 13 जनवरी को उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता के संवर्धन हेतु “विनियम 2026” जारी किया है। इसके तहत एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों की शिकायतों की जांच और उन्हें न्याय दिलाने के लिए प्रत्येक संस्थान में समता समिति और प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करना अनिवार्य किया गया है।
कमियां दूर करने की मांग
ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2019 से 2024 के बीच देशभर के उच्च शिक्षण संस्थानों में जातीय भेदभाव की 1,060 शिकायतें दर्ज हुईं। साथ ही रोहित वेमुला, डॉ. पायल तड़वी और दर्शन सोलंकी सहित 122 छात्रों ने आत्महत्या की, जिनमें से लगभग 50 प्रतिशत मामले जातीय भेदभाव से जुड़े बताए गए हैं।
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सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर
- संगठनों ने चिंता जताई कि इस प्रगतिशील कानून का कुछ वर्गों द्वारा विरोध किया जा रहा है और सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई है। न्यायालय ने 29 जनवरी को इस पर अस्थायी रोक लगा दी है।
- कास्ट्राईब और संविधान परिवार ने कानून का समर्थन करते हुए तीन प्रमुख सुधारों की मांग की है।
- शिक्षण संस्थानों के प्रमुख या अध्यक्ष को समता समिति का पदेन अध्यक्ष न बनाया जाए।
- समिति में एससी, एसटी और ओबीसी छात्रों का प्रतिनिधित्व केवल एक सदस्य तक सीमित न रखकर कम से कम 50 प्रतिशत किया जाए।
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समान रूप से लागू किया जाए कानून
इस कानून को केवल सीमित संस्थानों तक न रखकर यूजीसी अधिनियम 1956 की धारा 3 के अंतर्गत आने वाले सभी 1,168 विश्वविद्यालयों और 4,547 महाविद्यालयों में समान रूप से लागू किया जाए। इस प्रतिनिधिमंडल में कास्ट्राईब, संविधान परिवार, संविधान बचाओ संघर्ष समिति, आजाद समाज पार्टी और विभिन्न ओबीसी संगठनों के पदाधिकारी शामिल थे।
ज्ञापन सौंपने वालों में अमृत बन्सोड, गुलशन गजभिये, महिंद्र गडकरी, महादेव मेश्राम, मन्साराम दहिवले, रोशन जांभुलकर, सदानंद इलमे, ज्ञानचंद जांभुलकर, नरेंद्र बनसोड, रूपचंद रामटेके, मोरेश्वर गेडाम और प्रहार संगठन के अंकुश वंजारी सहित अन्य कार्यकर्ता उपस्थित थे।
