
भंडारा न्यूज
Agriculture Seed Scam: आधुनिक युग को तकनीक का युग कहा जाता है, लेकिन इसी तकनीकी दौर में धोखाधड़ी की घटनाएं भी तेजी से बढ़ रही हैं। कृषि क्षेत्र में नकली और घटिया बीजों की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। बीज बोने के बाद भी अंकुरण न होना और फसल का अपेक्षित उत्पादन न मिलना किसानों को आर्थिक रूप से कंगाल बना रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसानों को बीज खरीदते समय अत्यधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
हर वर्ष खरीफ और रबी मौसम के दौरान बीज कंपनियां बेहतर उत्पादन का दावा करती हैं, लेकिन विदर्भ के कई जिलों में नकली बीजों की बिक्री की जा रही है। किसान जब मेहनत और भरोसे के साथ बीज बोते हैं, तब यदि बीज ही खराब निकल जाए तो उनकी सारी मेहनत बेकार हो जाती है।
अंकुरण न होने के कारण किसान को दोबारा बुआई करनी पड़ती है या फिर पूरी फसल ही नष्ट हो जाती है, जिससे उसे भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। खेती की जुताई, बुआई, मजदूरी, खाद और सिंचाई पर किया गया पूरा खर्च नकली बीजों के कारण व्यर्थ चला जाता है। केवल विदर्भ ही नहीं, बल्कि पूरे राज्य में विभिन्न कंपनियों के बीज कृषि केंद्रों के माध्यम से किसानों को बेचे जाते हैं।
ऐसे में यह तय करना मुश्किल हो जाता है कि दोष बीज कंपनियों का है या वितरण व्यवस्था का, लेकिन नुकसान हमेशा किसान को ही उठाना पड़ता है। कई मामलों में ऐसा देखा गया है कि खरीफ या रबी मौसम में धान की फसल बोने के बावजूद बालियां तक नहीं निकलतीं या समय पर बुवाई करने के बाद भी उत्पादन में भारी गिरावट दर्ज की जाती है।
पेराई से लेकर कटाई और मड़ाई तक किसान दिन-रात मेहनत करता है, लेकिन अंत में नकली बीज उसकी सारी उम्मीदों पर पानी फेर देते हैं। नकली सोयाबीन सहित अन्य फसलों के बीज किसानों को बेचे जा रहे हैं।
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जब किसान शिकायत करता है, तो कंपनियों की ओर से यह कहकर पल्ला झाड़ लिया जाता है कि बुआई समय पर नहीं की गई या बीज में कोई दोष नहीं है। इस स्थिति में जानकारी और संसाधनों की कमी से जूझ रहा किसान आसानी से ठगा जाता है। दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि संबंधित विभाग भी कई बार इस गंभीर समस्या पर मौन साधे रहते हैं।
किसानों और कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि इस मुद्दे को लेकर जनप्रतिनिधियों को आवाज उठाने की जरूरत है। साथ ही नकली बीज बेचने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, बीज कंपनियों की जवाबदेही तय करने और किसानों को जागरूक करने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए, ताकि किसान मेहनत की कमाई और भविष्य दोनों को सुरक्षित रख सकें।






