AIMIM Growth:छत्रपति संभाजीनगर नगर निगम चुनाव (सोर्सः सोशल मीडिया)
Sambhajinagar Municipal Election: नगर निगम चुनाव में भाजपा ने 115 में से 56 सीटें जीतकर शिवसेना को यह स्पष्ट संदेश दिया है कि संभाजीनगर में अब वही “बड़ा भाई” है। AIMIM ने 33 सीटें जीतकर नगर निगम में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी का स्थान हासिल किया है, जबकि शिंदे गुट की शिवसेना तीसरे नंबर पर खिसक गई है और उसे केवल 14 सीटों पर संतोष करना पड़ा है।
नगर निगम चुनाव में सीट शेयरिंग को लेकर शिवसेना और भाजपा के बीच गठबंधन आखिरी समय में टूट गया था। शिंदे गुट की शिवसेना का दावा था कि वह शहर में मजबूत है, इसलिए उसे अधिक सीटें मिलनी चाहिए। दूसरी ओर, भाजपा ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि शहर में उसकी ताकत बढ़ी है और उसे अधिक सीटें मिलनी चाहिए।
सीट बंटवारे को लेकर भाजपा और शिवसेना के बीच खींचतान मुंबई तक पहुंच गई थी। दोनों दलों के वरिष्ठ नेताओं के हस्तक्षेप के बावजूद स्थानीय स्तर पर सहमति नहीं बन पाई। गार्डियन मंत्री संजय शिरसाट भाजपा को अधिक सीटें देने के पक्ष में दिखे, लेकिन विधायक प्रदीप जायसवाल और जिला अध्यक्ष राजेंद्र जंजाल ने इसका विरोध किया। जंजाल और शिवसेना कार्यकर्ताओं ने गार्डियन मंत्री के घर के सामने धरना भी दिया।
इसके बाद, नामांकन दाखिल करने के अंतिम दिन सुबह-सुबह गार्डियन मंत्री शिरसाट ने गठबंधन टूटने का ऐलान कर दिया। गठबंधन टूटने का सबसे अधिक फायदा AIMIM को मिला, जिसे कई वार्डों में वोटों के बंटवारे का सीधा लाभ हुआ। गुलमंडी क्षेत्र में भाजपा-शिवसेना को वोट विभाजन के कारण दो सीटों का नुकसान उठाना पड़ा।
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छत्रपति संभाजीनगर को लंबे समय से शिवसेना का गढ़ माना जाता रहा है। 1988 से हुए नगर निगम चुनावों में शिवसेना का दबदबा रहा, जबकि पहले चुनाव में भाजपा अपना खाता भी नहीं खोल पाई थी। हालांकि, 38 साल बाद भाजपा ने 56 सीटें जीतकर पहला स्थान हासिल कर लिया, जबकि शिवसेना 29 सीटों से गिरकर महज 12 सीटों पर सिमट गई। इन नतीजों से साफ हो गया है कि भाजपा ने शिवसेना के पारंपरिक गढ़ में अपनी मजबूत पकड़ बना ली है।
AIMIM ने 2014 के विधानसभा चुनाव से शहर में राजनीतिक एंट्री की थी। इसके बाद 2015 के नगर निगम चुनाव में पार्टी ने 24 पार्षद जिताए थे। दस साल बाद AIMIM की ताकत बढ़कर 33 सीटों तक पहुंच गई है, जो उसकी लगातार बढ़ती राजनीतिक मौजूदगी को दर्शाता है।