Mumbai News: ठाकरे बंधु बने ‘कर्ण-अर्जुन’, मुंबई में बचाई सियासी इज्जत

Mumbai Mayor Election: मुंबई महानगरपालिका चुनाव में भाजपा-महायुति की जीत के बावजूद ठाकरे बंधुओं ने एकजुट होकर 72 सीटें जीतते हुए अपना राजनीतिक अस्तित्व और सियासी इज्जत बचाई।
Thackeray Brothers
Mumbai Mayor Election:मुंबई महानगरपालिका चुनाव (सोर्सः सोशल मीडिया)
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BMC Election Results: मुंबई महानगरपालिका के बहुप्रतीक्षित चुनावों के परिणाम शुक्रवार देर शाम तक घोषित कर दिए गए। विधानसभा चुनाव की तर्ज पर इस बार भी मुंबई महानगरपालिका चुनाव में भाजपा और उसकी महायुति ने बंपर जीत दर्ज की। हालांकि, परिस्थितियां पूरी तरह भाजपा के पक्ष में होने के बावजूद ठाकरे बंधुओं ने इस चुनाव में ‘कर्ण–अर्जुन’ की तरह एकजुट होकर मुकाबला किया और अपना राजनीतिक ब्रांड व सियासी इज्जत बचाने में सफलता हासिल की।

227 सीटों वाली मुंबई महानगरपालिका में बहुमत के लिए 114 सीटों की आवश्यकता होती है। शुक्रवार को खबर लिखे जाने तक मिले रुझानों के अनुसार भाजपा (99), शिवसेना (शिंदे गुट) (30) और आरपीआई (आठवले) के गठबंधन वाली महायुति लगभग 129 सीटों पर बढ़त बनाए हुए थी। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) और राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के गठबंधन ने लगभग 72 सीटों पर बढ़त दर्ज की।

महापौर बनाने का सुनहरा अवसर

इसके अलावा कांग्रेस 15 सीटों पर, जबकि उपमुख्यमंत्री अजित पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) केवल 3 सीटों पर आगे चल रही थी। यह चुनाव भाजपा और ठाकरे बंधुओं-दोनों के लिए बेहद अहम माना जा रहा था। भाजपा के सामने पहली बार मुंबई में अपने दम पर महापौर बनाने का सुनहरा अवसर था, वहीं दूसरी ओर धन, सत्ता और संख्या बल में कहीं अधिक मजबूत महायुति के सामने सम्मानजनक प्रदर्शन कर अपना और अपनी पार्टियों का सियासी भविष्य बचाने की चुनौती ठाकरे बंधुओं के सामने थी। इस चुनौती को पार करने में ठाकरे बंधु सफल रहे।

72 सीटों की जीत रही अहम

लगभग 20 वर्षों तक एक-दूसरे के कट्टर विरोधी रहे ठाकरे बंधु 2024 के विधानसभा चुनावों में अपनी पार्टियों के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद एक साथ आने को मजबूर हुए। उनकी इस राजनीतिक सुलह को मीडिया और राजनीतिक गलियारों में ‘कर्ण-अर्जुन’ की संज्ञा दी गई।

हालांकि 2026 के महानगरपालिका चुनाव में ठाकरे बंधु सत्ता पर काबिज नहीं हो सके, इसके बावजूद 72 सीटों पर मिली जीत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यह परिणाम उन तमाम राजनीतिक विश्लेषकों के लिए करारा जवाब है, जो बीएमसी चुनाव के बाद ठाकरे बंधुओं के सियासी अस्तित्व के खत्म होने की भविष्यवाणी कर रहे थे।

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