गुंठेवारी नियमितीकरण बना बोझ, रेडी रेकनर शुल्क पर नागरिकों का आक्रोश; एक समान दर की मांग तेज

Unauthorized Plot Regularization: रेडी रेकनर दर पर शुल्क वसूली से गुंठेवारी नियमितीकरण आम लोगों के लिए महंगा हो गया है। पहले समान दर थी, अब भारी बोझ पड़ रहा है। नागरिक एक समान शुल्क की मांग कर रहे हैं
Regularization of unauthorized plots becomes a burden, citizens express anger over ready reckoner charges; demand for a uniform rate intensifies
प्रतीकात्मक तस्वीर ( सोर्स: सोशल मीडिया )
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Gunthewari Regularization Charges: छत्रपति संभाजीनगर शहर में जारी गुंठेवारी नियमितीकरण अभियान अब आम संपत्तिधारकों के लिए आर्थिक परेशानी का कारण बनता जा रहा है। कानूनी प्रावधान स्पष्ट न होने के बावजूद रेडी रेकनर दर के आधार पर शुल्क वसूले जाने से नागरिकों पर भारी वित्तीय बोझ पड़ रहा है।

इस कारण नियमितीकरण प्रक्रिया जटिल हो गई है और समान शुल्क लागू करने की मांग जोर पकड़ रही है। राज्य सरकार ने गुंठेवारी कानून के तहत 31 दिसंबर 2020 तक के अनधिकृत निर्माणों को नियमित करने का निर्णय लिया था।

इसके बाद मनपा द्वारा प्रशमन शुल्क लेकर नियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू की गई। शहर में वर्ष 2001 से यह कानून लागू है और 2015 तक सभी क्षेत्रों में एक समान दर से प्रति वर्ग मीटर 135.50 रुपये शुल्क लिया जाता था। उस दौरान रेडी रेकनर दर का कोई आधार नहीं था, जिससे आम नागरिकों को राहत मिलती थी।

2021 के बाद बदली गई थी शुल्क की गणना

वर्ष 2021 के बाद नियमितीकरण प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया गया। प्रशमन शुल्क और विकास शुल्क के साथ रेडी रेकनर दर जोड़ दिए जाने से गुंठेवारी नियमितीकरण की राशि लाखों रुपये तक पहुंच गई। इससे गरीब और मध्यम वर्ग के लिए अपने घरों को वैध कराना मुश्किल हो गया है। सूत्रों के अनुसार, नगररचना विभाग की यूडीसीपीआर नियमावली में गुंठेवारी का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है। यह नियमावली केवल नए निर्माणों पर लागू होती है। इसके बावजूद इसी नियमावली का हवाला देकर शुल्क वसूले जाने पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। आरोप है कि अधिकारियों की मनमानी से सामान्य संपत्तिधारक अनावश्यक परेशानी झेल रहे हैं। शहर के कई जाने-माने वास्तुविशारदों ने भी रेडी रेकनर दर लागू करने पर आपत्ति जताई है।

आज तक 1,224 आवेदन हैं लंबित

मनपा के गुंठेवारी विभाग में 1 अप्रैल 2025 से 3 फरवरी 2026 तक कुल 9,322 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से 8,082 आवेदनों को मंजूरी दी गई, जबकि 1,240 आवेदन लंबित है। नियमों के अनुरूप न होने के कारण बड़ी संख्या में आवेदन वापस किए गए। इस अवधि में मनपा को गुंठेवारी नियमितीकरण से 70 करोड़ 80 लाख 44 हजार 514 रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है। यदि प्रक्रिया को सरल और न्यायसंगत नहीं बनाया गया, तो नागरिकों में असंतोष बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

अलग दर से शुल्क गलत

उनका कहना है कि गुंठेवारी क्षेत्रों में सड़क, जलापूर्ति, ड्रेनेज और स्ट्रीट लाइट जैसी बुनियादी सुविचाएं पहले से उपलब्ध कराई जा चुकी हैं। ऐसे में अधिक और अलग दर से शुल्क लेना अनुचित है।

जानकारों का मानना है कि यदि सभी क्षेत्रों के लिए एक समान दर लागू की जाती है, तो गरीब और निम्न आय वर्ग के नागरिकों के घर कानूनी हो सकेंगे। साथ ही। मनपा के राजस्व में भी बढ़ोतरी होगी, मौजूदा दर सरचना के कारण कई लोग नियमितीकरण से दूरी बनाए हुए है।

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