

Chhatrapati Sambhajinagar Municipal Corporation Administration: छत्रपति संभाजीनगर मनपा प्रशासन द्वारा शहर के लगभग 90 प्रतिशत नालों की मानसून पूर्व सफाई पूरी किए जाने का दावा किया जा रहा है, लेकिन शहर के अनेक क्षेत्रों में स्थिति इसके विपरीत दिखाई दे रही है। नालों से निकाली गई गाद, प्लास्टिक कचरा, झाड़ियां और अन्य अपशिष्ट सामग्री अब भी नालों के किनारों पर बड़े-बड़े ढेरों के रूप में पड़ी हुई है। आगामी मानसून के मद्देनजर यह स्थिति चिंता का विषय बन गई है, क्योंकि बारिश शुरू होते ही यह मलबा दोबारा नालों में बह सकता है।
इससे जल निकासी व्यवस्था प्रभावित होने और शहर में जलभराव की समस्या पैदा होने की आशंका व्यक्त की जा रही है। मनपा के यांत्रिकी विभाग द्वारा विभिन्न क्षेत्रीय कार्यालयों के माध्यम से प्रमुख और उपनालों की सफाई का कार्य किया जा रहा है।
प्रशासन का कहना है कि अधिकांश क्षेत्रों में सफाई कार्य पूरा कर लिया गया है और मानसून से पहले सभी आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं। मौसम विभाग ने जून माह के प्रारंभ से मराठवाड़ा क्षेत्र सहित छत्रपति संभाजीनगर में मानसून सक्रिय होने की संभावना जताई है। हालांकि, शहर के कई हिस्सों में नालों से निकाला गया मलबा अब तक नहीं हटाया गया है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सफाई के नाम पर केवल गाद को नालों से निकालकर किनारे रख दिया गया है।
खाम नदी और सुखना नदी के किनारे स्थित बस्तियां हर वर्ष मानसून के दौरान सबसे अधिक प्रभावित होती हैं। नालों में गाद जमा होने से पानी की निकासी धीमी पड़ जाती है और निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। कई बार घरों में पानी घुसने और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के लिए मजबूर होना पड़ता है। नागरिकों का कहना है कि यदि इस बार भी गाद का समुचित निस्तारण नहीं किया गया तो नदी किनारे रहने वाले लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
स्थानीय नागरिकों ने छत्रपति संभाजीनगर मनपा प्रशासन से मांग की है कि नालों से निकाली गई गाद और कचरे को तत्काल उठाकर निर्धारित स्थानों पर पहुंचाया जाए। उनका कहना है कि सफाई अभियान तभी सफल माना जाएगा जब निकाले गए मलबे का पूरी तरह निस्तारण किया जाए। नागरिकों ने प्रशासन से मानसून शुरू होने से पहले स्थायी और प्रभावी उपाय करने की भी मांग की है। मानसून के आगमन में अब केवल कुछ दिन शेष है।
ऐसे में प्रशासन के लिए नालों की सफाई के साथ-साथ गाद हटाने का कार्य भी शीघ्र पूरा करना आवश्यक माना जा रहा है। यदि समय रहते यह कार्य नहीं हुआ तो पहली ही तेज बारिश के बाद शहर के कई क्षेत्रों में जलभराव, सड़कें डूबने, यातायात बाधित होने तथा घरों में पानी घुसने जैसी समस्याएं फिर से सामने आ सकती हैं। इससे मनपा की मानसून पूर्व तैयारियों के दावों पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं।
छत्रपति संभाजीनगर शहर के कई प्रमुख चौराहों, बाजार क्षेत्रों और निचले इलाकों में हर वर्ष बारिश के दौरान पानी जमा होने की समस्या सामने आती है। यदि नालों की क्षमता कम हुई तो सड़कें जलमग्न हो सकती हैं, जिससे यातायात प्रभावित होगा और नागरिकों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा, विशेषज्ञों का भी मानना है कि केवल नालों की सफाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि निकाले गए मलबे को तत्काल हटाना भी उतना ही आवश्यक है।