

Sambhajinagar Record Tampering Case: छत्रपति संभाजीनगर नाशिक रोड केंद्रीय कारागार में कैदियों की समय पूर्व रिहाई के लिए अभिलेखों में कथित हेरफेर के मामले में फंसे 2 जेल अधिकारियों के खिलाफ चल रही विभागीय जांच पर महाराष्ट्र प्रशासनिक न्यायाधिकरण (मैट) की छत्रपति संभाजीनगर खंडपीठ ने अस्थायी रोक लगाई है।
न्यायाधिकरण के उपाध्यक्ष न्यायमूर्ति वीके जाधव व सदस्य न्यायमूर्ति विनय कारगांवकर ने यह भी स्पष्ट किया कि आपराधिक मामले का अंतिम फैसला आने तक यह रोक जारी रहेगी।
यदि आपराधिक मुकदमे की सुनवाई में अनावश्यक देरी होती है, तो संबंधित विभाग न्यायाधिकरण की अनुमति लेकर विभागीय जांच दोबारा शुरू कर सकता है।
नाशिक रोड़ केंद्रीय कारागार के तीन कैदियों की समयपूर्व रिहाई के लिए आधिकारिक रिकॉर्ड में छेड़छाड़ करने का आरोप श्रेणी 2 के जेल अधिकारी माधव खैरगे, श्रेणी 1 अधिकारी शामराव गीते व एक वरिष्ठ लिपिक पर लगाकर नाशिक रोड पुलिस थाने में केस भी दर्ज किया गया था।
जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने भादंसं की धारा 467, 468, 471 व 34 के तहत अदालत में आरोप-पत्र भी दाखिल किया गया है,
इसी आधार पर कारागार विभाग ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू की थी, जिसमें जालना जिला कारागार के अधीक्षक बतौर जांच अधिकारी नियुक्त थे।
आवेदनकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि आपराधिक मामले व विभागीय जांच के आरोप व गवाह एक होने से जांच के दौरान बचाव पेश करने से लंबित आपराधिक मामले पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए जांच स्थगित रखी जाए,
न्यायाधिकरण ने माना कि दोनों प्रक्रियाओं में आरोप व गवाह समान होने व आपराधिक मामले के लंबित रहते विभागीय जांच पूरी करना आरोपियों के बचाव को प्रभावित कर सकता है।
आपराधिक मामले के निर्णय तक जांच पर रोक जरूरी है। हालांकि, मामले में देरी की स्थिति में विभाग को स्थगन हटाने के लिए न्यायाधिकरण से अनुमति लेने की छूट दी गई है। याचिकाकर्ताओं की ओर से एड। चैतन्य धारूरकर ने पक्ष रखा।