Eknath Shinde Uddhav Thackeray Operation Tiger (डिजाइन फोटो)
Sanjay Shirsat On Operation Tiger: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर ‘ऑपरेशन’ की चर्चाएं तेज हो गई हैं। एकनाथ शिंदे के दिल्ली दौरे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के बाद शिवसेना (UBT) के खेमे में हलचल मची हुई है। चर्चा है कि ‘ऑपरेशन टायगर’ के जरिए उद्धव ठाकरे के गुट के 6 सांसदों को अपने पाले में लाने के लिए शिंदे गुट ने पूरी ‘फिल्डिंग’ सजा दी है। शिवसेना के कद्दावर नेता और मंत्री संजय शिरसाट ने छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) में मीडिया से बात करते हुए इस दावे को और हवा दे दी है कि यह ऑपरेशन होकर ही रहेगा।
शिरसाट के इस बयान ने विपक्षी गठबंधन की धड़कनें बढ़ा दी हैं, खासकर तब जब उद्धव ठाकरे ने अपने सांसदों की आपात बैठक बुलाई थी, जिसमें परभणी के सांसद संजय उर्फ बंडू जाधव की अनुपस्थिति ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
संजय शिरसाट ने ‘ऑपरेशन टायगर’ पर सस्पेंस बरकरार रखते हुए कहा कि एकनाथ शिंदे किसी भी ऑपरेशन को ढोल बजाकर नहीं करते। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा, “हमारे नेता एकनाथ शिंदे को ‘डॉक्टर’ की मानद उपाधि मिली है और वे जानते हैं कि कौन सा ऑपरेशन कब और कैसे करना है। वे सही समय पर अचूक फैसला लेने में माहिर हैं और ‘ऑपरेशन टायगर’ का वक्त अब करीब आ गया है।” नवनियुक्त राज्यसभा सांसद ज्योति वाघमारे ने भी नांदेड़ में इसी तरह के संकेत दिए हैं, जिससे उद्धव गुट के सांसदों के टूटने की अटकलों को बल मिला है।
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विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे इन आरोपों पर कि राज्य सरकार भोंदू बाबा अशोक खरात के इशारों पर चलती है, शिरसाट ने कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा, “सरकार किसी बाबा के कहने पर नहीं, बल्कि एक सक्षम नेतृत्व के दम पर चलती है। अगर बाबा के कहने पर सरकार चलती, तो उन्हें ही मुख्यमंत्री बना दिया गया होता।” उन्होंने आगे कहा कि खरात के खिलाफ बलात्कार, धोखाधड़ी, नकली अंगूठियां बेचने और विदेशी निवेश जैसे गंभीर मामले सामने आए हैं। इस पूरी साखली (Chain) में जो भी शामिल होगा, उसे सरकार बख्शेगी नहीं और जल्द ही नई गिरफ्तारियां होंगी।
कांग्रेस नेता विजय वड्डेटीवार के उस बयान पर, जिसमें उन्होंने अशोक खरात के ‘एन्काऊंटर’ की आशंका जताई थी, शिरसाट ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि ऐसे बयान देना केवल समाज में भ्रम फैलाना और आरोपी को बचाने की कोशिश है। शिरसाट ने तंज कसते हुए कहा, “अगर वड्डेटीवार को इतनी ही चिंता है, तो उन्हें खरात का बॉडीगार्ड बन जाना चाहिए। किसी को मारकर मामला खत्म करना सरकार का काम नहीं है; सरकार कानूनी प्रक्रिया का पालन करती है ताकि पीड़ितों को न्याय मिल सके और अपराधी को कड़ी सजा मिले।”